कोलकाता : नेताजी इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकारी व सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेज व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए वर्ष 2020 से संशोधित यूजीसी वेतनमान लागू करने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने स्टेडियम में बैठे लगभग 15,000 शिक्षकों को तीन प्रतिशत इनक्रीमेंट के हिसाब से वर्ष 2016, 2017, 2018, 2019 का बकाया देने की घोषणा कर उन्हें लुभाने की कोशिश की. लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर पड़ता नहीं दिख रहा. राज्य के अलग-अलग जिलों से आये शिक्षकों ने इस बात पर रोष प्रकट किया कि देश के अधिकांश राज्यों में यूजीसी के सातवें वेतनमान को 2016 में ही लागू किया जा चुका है.
सीएम की घोषणा से संतुष्ट नहीं हैं राज्य के शिक्षक
कोलकाता : नेताजी इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकारी व सरकारी अनुदान प्राप्त कॉलेज व विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए वर्ष 2020 से संशोधित यूजीसी वेतनमान लागू करने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने स्टेडियम में बैठे लगभग 15,000 शिक्षकों को तीन प्रतिशत इनक्रीमेंट के हिसाब से वर्ष 2016, 2017, 2018, […]

हमारी सरकार अब इसे राज्य में लागू कर रही है, तो कोई बड़ा काम नहीं कर रही है. चार साल तक जो राज्य के शिक्षकों का नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा. कुछ शिक्षकों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि सरकार शिक्षकों को मूर्ख बना रही है. जो पहले लागू करना चाहिए था, उसे अब लागू कर रही है. वह भी शिक्षकों के आंदोलन के बाद. सरकार चार साल की भरपाई कैसे करेगी.
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में शिक्षकों से पूछा कि आप लोग खुश हैं ना, खुशी है तो इसका चेहरे पर भाव भी दिखाइये. लेकिन स्टेडियम में मौजूद हजारों शिक्षकों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. हालांकि कुछ चुनिंदा व तृणमूल समर्थित ग्रुप उनके सुर में सुर मिलाते नजर आये. लेकिन अधिकांश लोग असंतुष्ट नजर आये. इस बारे में पश्चिम बंग सरकारी कॉलेज शिक्षक समिति के महासचिव देवाशीष सरकार ने कहा कि सरकार ने जो घोषणा की है, वह शिक्षकों के हित में है. हम इसका स्वागत करते हैं, लेकिन यह पे स्केल 2016 से ही लागू है.
नियमानुसार इसमें शिक्षकों की आय का 50 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार व 50 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी. इसके बावजूद राज्य सरकार इसे टाल रही है. 2016 से दिसंबर, 2019 तक रिवाइज्ड पे स्केल से ही शिक्षकों को वेतन मिलना चाहिए. तीन साल तीन महीने के वास्तविक वेतन से तो शिक्षक वंचित ही रहे हैं. अन्य राज्यों में तो सभी शिक्षकों को उसी वेतनमान से वेतन मिला है, फिर यहां के शिक्षक क्यों नुकसान झेलेंगे. सरकार कैसे यह उम्मीद रख रही है कि राज्य के शिक्षक इस घोषणा से बहुत संतुष्ट होंगे. गौरतलब है कि इसी समस्या को लेकर 19-20 नवंबर को शिक्षकों के कुछ संगठन कॉलेज व विश्वविद्यालयों में कामकाज ठप रखेंगे.