सुंदरवन में डूबने से तीन वर्षों में 504 शिशुओं की मौत

शिव कुमार राउत, कोलकाता : सुंदरवन का नाम सुनने में रोमांचक लगता है, लेकिन यहां के बाशिंदों के लिए यह एक डरावना ठिकाना बन कर रह गया है. आखिर ऐसा क्यों है? भारत के राज्य पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरवन 54 छोटे द्वीपों का समूह है. सुंदरवन आदमख़ोर बाघों की धरती है, जहां हर साल […]

शिव कुमार राउत, कोलकाता : सुंदरवन का नाम सुनने में रोमांचक लगता है, लेकिन यहां के बाशिंदों के लिए यह एक डरावना ठिकाना बन कर रह गया है. आखिर ऐसा क्यों है? भारत के राज्य पश्चिम बंगाल में स्थित सुंदरवन 54 छोटे द्वीपों का समूह है.

सुंदरवन आदमख़ोर बाघों की धरती है, जहां हर साल दर्जनों लोग बाघों का शिकार बनते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि ये हमले लगातार बढ़ रहे हैं. बाघ पहले ही कइओं‍ को निगल चुका है. अब सुंदरवन के शिशुओं पर सामत आयी है.
ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल के दो जिले दक्षिण व उत्तर 24 परगना में फैले सुंदरवन इलाके में जुलाई 2016 से अब करीब 504 बच्चों की मौत सिर्फ डूबने की वजह से हुई है. चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूड (सीआईएनआई) द्वारा किये गये सर्वे में यह खुलासा हुआ है. दोनों जिलों में फैले सुंदरवन के 19 ब्लॉक के 222 गांव में इस सर्वे जारी है.
रिपोर्ट की एक प्राथमिक कॉपी डायमंड हार्बर, अलीपुर एवं बशीरहाट हेल्थ जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी गई है. सर्वे के अनुसार उत्तर 24 परगना के में 396 एवं दक्षिण 24 परगना के सुन्दरवन इलाके में 108 बच्चों की मौत पानी में डूबने से हुई है. डूब कर मरनेवाले शिशुओं में एक से 10 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं, जिसमें 296 बालक व 208 बालिका हैं.
इस विषय में सीआईएनआई स्टेट प्रोग्राम मैनेजर सुजय राय ने बताया कि सुंदरवन इलाके में तालाब और जलाशयों की संख्या काफी अधिक है. जलाशय घरों या आगन से सटे हुए हैं. उन्होंने बताया कि जितनी भी घटनाएं हुई हैं, ज्यादातर सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच की है, क्योंकि इस समय बच्चों की मां घर में खाना पकाने में व्यस्त रहती हैं और बच्चा अकेले खेलते हुए तालाब में‍ गिर जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है.
बच्चों को नहीं ले जाया जाता है अस्पताल :
सुंदरवन में वैसे सरकारी अस्पताल और डॉक्टरों की कमी है. इस वजह लोग डॉक्टर के बजाय ओझा और बाबा पर अधिक भरोसा करते हैं. डूबने वाले बच्चों के अस्पताल ले जाने के बजाय ओझा को बुला लिया जाता है.
सर्वे सोमवार को पूरा होगा, जबकि इसकी रिपोर्ट सितंबर महीने के अंत में राज्य स्वास्थ्य विभाग को सौंप दिया जायेगा. डूबने से बच्चों को बचाने के लिए कुछ सुझाव भी दिये गये हैं.
सुजय राय, स्टेट प्रोग्राम मैनेजर, सीआइएनआइ
सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद जरूर इस समस्या के समाधान पर कार्य किया जायेगा. सीआइएनआइ के सुझावों पर विचार किया जायेगा.
सचि रानी नस्कर, शिशु ओ नारी उन्नयन एंड त्राण व जनकल्याण, दक्षिण 24 परगना जिला परिषद.

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