गायब हो रही आदि गंगा को पुनर्जीवित करेगी नमामि गंगे

निगम ने सौंपा डीपीआइ इस वर्ष दिसंबर तक पूरी होगी परियोजना कोलकाता : महानगर की आदि गंगा का इतिहास काफी पुराना है, जो लगभग 75 किमी लंबी गंगा नदी का मूल प्रवाह है. अब यह कई स्थानों से विलुप्त हो चुकी है. तीन शताब्दी पूर्व बंगाल की खाड़ी की ओर गंगा का मुख्य प्रवाह था. […]

निगम ने सौंपा डीपीआइ

इस वर्ष दिसंबर तक पूरी होगी परियोजना
कोलकाता : महानगर की आदि गंगा का इतिहास काफी पुराना है, जो लगभग 75 किमी लंबी गंगा नदी का मूल प्रवाह है. अब यह कई स्थानों से विलुप्त हो चुकी है. तीन शताब्दी पूर्व बंगाल की खाड़ी की ओर गंगा का मुख्य प्रवाह था.
आज यह प्रवाह सीवर, कचरा और मेट्रो रेल नेटवर्क के नीचे दफन हो गयी है और यह अतिक्रमण व्यक्तिगत तालाबों और घरों में तब्दील हो गया है. पिछले तीन दशक में आदि गंगा का विनाश तेजी से हुआ है. विलुप्त हो रही है आदि गंगा को बचाने के लिए राज्य ने विशेष पहल की है.
नमामि गंगे परियोजना के तहत आदि गंगा की वर्तमान स्थिति में सुधार, ड्रेजिंग तथा नदी में प्रवाहित शहर का गंदा पानी साफ किया जायेगा. राज्य सरकार के निर्देश पर कोलकाता नगर निगम नमामि गंगे परियोजना के तहत डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर केंद्र सरकार को सौंप चुकी है. डीपीआर के अाधार पर केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने राज्य सरकार की उक्त परियोजना को हरी झंडी दिखा दी है.
आदि गंगा की सफाई पर 219.54 करोड़ रुपये का खर्च आयेगा. अप्रैल महीने से कार्य शुरू होने की संभावना है, जो वर्ष के अंत तक चलेगा. वहीं, एनएमजीसी ने अगले 15 साल के लिए आदि गंगा की रख-रखाव, ड्रेजिंग तथा अन्य कार्यों पर आनेवाले खर्च के लिए भी 216.22 करोड़ रुपये आवंटित किया है. निगम ने महानगर के दहीघाट से गरिया रेलब्रिज तक 15.5 किलोमीटर लंबी खाल की ड्रेजिंग करने की योजना बनायी है.

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