साहब तो चले गये, हम रह गये मरने को

कोलकाता. साहब तो चले गये, लेकिन हम रह गये यहां रोज मरने के लिए. क्या यही स्थिति रहेगी हमारे बैरक की. पिछले वर्ष जब पूर्व रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी हमारे बैरक में आये तो स्थिति देख कर दंग रह गये थे. उन्होंने जजर्र बैरक को तोड़ कर उसके स्थान पर नया बैरक बनाने का […]

कोलकाता. साहब तो चले गये, लेकिन हम रह गये यहां रोज मरने के लिए. क्या यही स्थिति रहेगी हमारे बैरक की. पिछले वर्ष जब पूर्व रेल राज्यमंत्री अधीर रंजन चौधरी हमारे बैरक में आये तो स्थिति देख कर दंग रह गये थे.

उन्होंने जजर्र बैरक को तोड़ कर उसके स्थान पर नया बैरक बनाने का आश्वासन भी दिया था, लेकिन आज एक साल से ज्यादा होने को आये, लेकिन कुछ खास नहीं हुआ. यदि यह बैरक बन गया होता तो शायद आज राजेंद्र साह को अपनी जान नहीं गवानी पड़ती. उक्त बातें एक आरपीएफ के जवान ने दबे हुए स्वर में कही, लेकिन उनमें प्रशासन के खिलाफ आक्रोश साफ झलक रहा था.

उसने नाम न छापने का आग्रह किया. गुरुवार को हावड़ा स्टेशन व रेलवे सुरक्षा बल के बैरक टंडैल बागान में दिन भर करंट लगने से एएसआइ के मरने की खबर चर्चा का विषय बनी रही. गौरतलब है कि बुधवार को हावड़ा स्टेशन से लगे टंडैल बागान स्थित आरपीएफ ट्रेन स्कॉर्ट कंपनी में सब इंस्पेक्टर राजेंद्र साह ड्यूटी करने के लिए पहुंचे. उनकी ड्यूटी हावड़ा स्टेशन से 8.30 बजे छूटनेवाली हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस में स्कॉर्ट लीडर के रूप में थी.

वह अपनी वर्दी बदलने चेंज रूम की तरफ जा रहे थे कि जोरदार झटके के साथ गिर पड़े और कुछ ही मिनटों की छटपटाहट के बाद उनका शरीर शिथिल पड़ गया. आरपीएफ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को देर शाम जब घटना घटी, उस वक्त टंडैल बागान आरपीएफ बैरक के ट्रेन स्कॉर्ट कंपनी पोस्ट में बरसात का पानी जमा था, जिस स्थान पर पानी जमा था, वहीं बिजली विभाग द्वारा का अर्थिग तार लगाया हुआ था. हर बार बारिश में यहां पानी जमना तय है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >