- खदानों में श्रमिकों की सुरक्षा पर सर्वाधिक जोर दिया सीएमडी ने
- पॉजीटिव ग्रोथ के बावजूद रोजाना 1.90 लाख टन का खनन जरूरी
- बेहतर गुणवत्ता के कोयले का डिस्पैच बढ़ाने से कंपनी होगी मजबूत
सांकतोड़िया : ईसीएल मुख्यालय के प्रशासनिक भवन के सम्मलेन कक्ष में बुधवार को अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक प्रेम सागर मिश्रा की अध्यक्षता में महाप्रबंधक समन्वय समिति की बैठक हुई, जिसमें कंपनी के कोयला उत्पादन, डिस्पैच तथा ओवरबर्डेन हटाने के मुद्दे पर समीक्षा का गई.
इसमें तकनीकी निदेशक (ऑपरेशन) सुनील कुमार झा, तकनीकी निदेशक (योजना व परियोजना) जयप्रकाश गुप्ता, वित्त निदेशक संजीव सोनी, कार्मिक निदेशक विनय रंजन, सीएमडी के तकनीकी सचिव नीलाद्रि राय, सभी एरिया के महाप्रबंधक एवं सभी विभाग के विभागाध्यक्ष मौजूद थे.
सीएमडी श्री मिश्रा ने सभी एरिया के महाप्रबंधकों से बारी-बारी से कोयला उत्पादन, डिस्पैच एवं खदानों की स्थिति के बारे में जानकारी ली. उन्होंने कहा कि कोयले की मांग को देखते हुए उत्पादन और बढ़ाना होगा और सभी क्षेत्रों को निश्चित समय पर लक्ष्य हासिल करना होगा. इसके साथ ही कोयले की गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी तथा कोयले का डिस्पैच भी बढ़ाना होगा.
लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है. उन्होंने कहा कि उत्पादन लक्ष्य हासिल करने के लिए टीम वर्क जरूरी है. जहां भी परेशानी आ रही है, वहां वरीय अधिकारियों से मिलकर उसे हल करें. खदानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा प्राथमिकता में शामिल करें.
उन्होंने कहा कि कंपनी भले ही पिछले वर्ष की तुलना मेँ चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन तथा डिस्पैच मेँ 19 फीसदी के सकारात्मक ग्रोथ में है, परन्तु अभी भी उत्पादन लक्ष्य हसिल करने के लिए लगभग 22 मिलियन टन अतिरिक्त कोयले का उत्पादन करना होगा. यह तभी संभव है जब प्रतिदिन 1.90 लाख टन का उत्पादन हो. इस चुनौती को ध्यान मेँ रखकर काम करना होगा.
