कैम्ब्रिज ग्लोबल एजुकेशन सेंसस 2018 की रिपोर्ट, विकसित देशों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन कर रहे भारतीय छात्र

कोलकाता : भारत ने दुनियाभर के स्कूलों में जिंदगी और छात्रों की कैरियर संबंधी पसंद पर रोशनी डालनेवाले 2018 के जनरल एजुकेशन सेंसस में विकसित देशों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है. भारतीय छात्र दुनियाभर के कई अन्य देशों के छात्रों की तुलना में ज्यादा पाठ्येतर गतिविधियां करते हैं, जिनमें स्कूल के बाद खेल और […]

कोलकाता : भारत ने दुनियाभर के स्कूलों में जिंदगी और छात्रों की कैरियर संबंधी पसंद पर रोशनी डालनेवाले 2018 के जनरल एजुकेशन सेंसस में विकसित देशों के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है. भारतीय छात्र दुनियाभर के कई अन्य देशों के छात्रों की तुलना में ज्यादा पाठ्येतर गतिविधियां करते हैं, जिनमें स्कूल के बाद खेल और अतिरिक्त कक्षाएं शामिल हैं.
कैम्ब्रिज इंटरनेशनल की वैश्विक शिक्षा गणना (ग्लोबल एजुकेशन सेंसस) 2018 के तहत 10 देशों के बीच किये गये सर्वेक्षण के अनुसार, भारतीय छात्र अन्य देशों के छात्रों की तुलना में अपने शेड्यूल में अधिक गतिविधियां शामिल करते हैं. लगभग दो-तिहाई भारतीय छात्र स्कूल के बाद प्रमुख विषयों के लिए अतिरिक्त ट्यूशन लेते हैं और 72% पाठ्येतर गतिविधियों में भाग लेते हैं और 74% कहते हैं कि वे स्कूल में नियमित रूप से खेल खेलते हैं.
वहीं, भारतीय छात्र पढ़ाई के साथ-साथ गृह कार्य में लगाये जानेवाले समय के मामले में भी ऊंचे स्थान पर हैं. 40% भारतीय छात्र हर दिन अपने होमवर्क पर 2-4 घंटे खर्च करते हैं. जबकि 37% छात्र सप्ताहांत में भी इतना ही समय देते हैं. दुनिया में अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक कार्यक्रमों के अग्रणी प्रदाता कैम्ब्रिज इंटरनेशनल ने 2018 के लिए अपनी वैश्विक शिक्षा गणना के नतीजों की घोषणा की है. इस अध्ययन के माध्यम से दुनियाभर के स्कूलों में छात्रों और उनके शिक्षकों के जीवन की समीक्षा रिपोर्ट पेश की गयी है.
इसके तहत दुनियाभर में लगभग 20,000 शिक्षकों और छात्रों के बीच सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें भारत भर के 4400 शिक्षक और 3800 छात्र शामिल थे. 2018 की गणना के नतीजे भारतीय स्कूलों की संस्कृति और शिक्षण पद्धतियों में बदलाव को दर्शाते हैं. यह इस तथ्य का एक प्रमाण है कि स्कूल रट्‌टा मारकर सीखने की संस्कृति को छोड़कर ऐसी संस्कृति की ओर बढ़ रहे हैं, जो समग्र बाल विकास पर केंद्रित है, जो कि अंतत: छात्रों को उनके व्यवसाय संबंधी प्रयासों में सफल होने में मददगार होगी.
गणना से यह भी पता चलता है कि भारतीय छात्र न केवल अकादमिक रूप से आगे बढ़ते हैं, बल्कि अपने हितों और शौक की पूर्ति के लिए सीखने के अन्य अवसरों का उपयोग भी करते हैं.
कैम्ब्रिज इंटरनेशनल में दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय निदेशक रुचिरा घोष ने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया का अर्थ है कि इतिहास के किसी भी अन्य दौर के मुकाबले आज के छात्रों के लिए ज्यादा अवसर उपलब्ध हैं. जहां इसके स्पष्ट लाभ हैं, वहीं इसका यह मतलब भी है कि पाठ्येतर गतिविधियों के जरिये और पूरक शिक्षण संसाधनों का उपयोग करके भारतीय छात्र कक्षा के बाहर अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करने में निवेश कर रहे हैं.
भारतीय शिक्षक भी छात्रों को उनकी सर्वोत्तम क्षमताओं के अनुरूप प्रदर्शन करने में मदद करने के लिए समर्पित हैं और परीक्षा में छात्रों को अच्छी तरह तैयारी कराने के लिए अपना समय खपाने के मामले में सर्वेक्षण में शीर्ष पर हैं.
डॉक्टर व इंजीनियर बनना चाहते हैं अधिकांश भारतीय छात्र
चिकित्सा और इंजीनियरिंग भारतीय छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय कॅरियर आकांक्षाएं हैं. 23% भारतीय छात्रों का कहना है कि वे डॉक्टर/ दंत चिकित्सक बनना चाहते हैं, 23% इंजीनियर और 16% सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहते हैं. भारत में आठ प्रतिशत छात्र वैज्ञानिक बनना चाहते हैं.

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