कोलकाता : राज्य की विभिन्न जेलों में प्राय: कैदियों के सेल में मोबाइल फोन पकड़े जाने की घटनाएं सामने आती हैं. इन घटनाओं से सबक लेते हुए अब राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है.
सरकार ने कानून में संशोधन करते हुए इसे दंडनीय अपराध बनाने को विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश करते हुए इसे पारित किया था. राज्य सरकार द्वारा पेश किये गये इस विधेयक को अब राज्यपाल की भी मंजूरी मिल चुकी है, इससे कानून को लागू करने का रास्ता अब साफ हो गया है. राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है.
गौरतलब है कि विधानसभा में पारित पश्चिम बंगाल करेक्शनल सर्विस संशोधन बिल- 2018 के तहत जेलों के अंदर कैदियों के पास से किसी भी प्रकार के संचार उपकरण जैसे- मोबाइल, सिम कार्ड, मेमोरी कार्ड, बैटरी या चार्जर आदि पकड़े जाने पर अब तीन साल की सजा होगी.
इन संचार उपकरणों में पर्सनल कंप्यूटर, वाइफाइ, टैब, लैपटॉप भी शामिल हैं. नये कानून के तहत इन उपकरणों के इस्तेमाल करते जो कैदी पकड़े जायेंगे, उन्हें तीन साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी. नये कानून के तहत जेलों में कैदियों तक मोबाइल व अन्य संचार उपकरण पहुंचने के काम में यदि कोई जेल अधिकारी या कर्मचारी लिप्त पाये जाते हैं तो उन्हें भी तीन साल तक कैद और 3000 रुपये का जुर्माना अथवा दोनों लगाया जा सकता है.
