कोलकाता : पोलैंड के ग्लोबल सॉल्यूशंस और हॉलैंड माइक्रोजेन इंजन कार्पोरेशन के दो सदस्यीय प्रतिनिधि दल ने भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स में गोबर से बिजली बनाने के अपने अभिनव उपाय की जानकारी एक परिचर्चा सत्र में दी. इस संबंध में जो तकनीक है वह गोबर के सूखे पावडर तथा इंधन के अन्य प्रकार जैसे राइस हस्क, स्ट्रॉ व बायोचर हैं जिससे बिजली व थर्मल उर्जा घर मेें बनायी जा सकती है या फिर इसे पानी को गर्म या ठंडा करने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
मार्सिन विल्सजाइंसकी ने इसकी जानकारी दी. उपकरण को स्टर्लिंग इंजन्स द्वारा चलाया जाता है और इसका उत्पादन माइक्रोजेन इंजन कार्पोरेशन ने किया है जिसके वरीय प्रतिनिधि जेरविन लबर्स ने इंजन और कंपनी के अन्य उत्पादों के संबंध में विस्तृत प्रस्तुति दी. मार्सिन विल्सजाइंसकी के पिता डॉ वीइस्लॉ विल्सजाइन्सकी ने इस अभिनव मेकानिज्म को विकसित किया है. वह पश्चिम बंगाल में कंपनियों के साथ गठजोड़ के लिए आये हैं.
भारत चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सीताराम शर्मा ने कहा कि गोबर का वाणिज्यिक उपयोग केवल बायोगैस तक सीमित था लेकिन अब इसे बिजली उत्पादन के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी काफी बेहतरीन संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि भारत विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादनवाला देश है लिहाजा गोबर से इस तकनीक का इस्तेमाल कर बिजली उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं.
यह पर्यावरण हितैषी भी है. कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि राज्य सभा के सदस्य तथा राज्य के पूर्व बिजली मंत्री मनीष गुप्ता ने कहा कि भारत, वर्तमान में ऊर्जा सुरक्षा तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युतीकरण की दिशा में प्रयास कर रहा है और यह आर्थिक संपन्नता के लिए जरूरी भी है. वेस्ट बंगाल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री डेवेलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अनिंद्य चटर्जी ने कहा कि दिखायी गयी तकनीक की काफी संभावनाएं हैं और समाज को इससे काफी फायदा हो सकता है.
