वर्ष 2022 तक बंगाल में 200 मेगावाट सौर बिजली का होगा उत्पादन
पश्चिम बंगाल अगले साल शुरू करेगा तैरता सौर संयंत्र
कोलकाता : बिजली विभाग कुल तकनीकी और वाणिज्यिक (एटीसी) नुकसान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. बिजली विभाग ने पिछले चार वर्षों में इसे 32 प्रतिशत से कम करते हुए 28 प्रतिशत कर दिया है. और अब बिजली विभाग ने इसे अगले कुछ वर्षों में 11 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है.
यह जानकारी शनिवार को राज्य के बिजली व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मर्चेंट चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री व पश्चिम बंगाल राज्य बिजली बोर्ड अधिकारी संघ द्वारा आयोजित एक सेमिनार के दौरान दी.
उन्होंने बताया कि एटीसी नुकसान से विभाग का अस्तित्व भी खतरे में है, इसलिए बिजली विभाग इसे हर हाल में कम करना चाहती है. विभाग ने पूरे राज्य में 72 अधिकारियों की नियुक्ति की है, जो गांव-गांव जाकर नुकसान को कम करने के लिए अभियान चला रहे हैं.
इसके साथ ही बिजली मंत्री ने विभाग की नयी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार की अगले साल तक राज्य में तैरते सौर संयंत्र शुरू करने की योजना है. शोभनदेव चटर्जी ने बताया कि सरकार दो ऐसे संयंत्र सागरदीघि और मुकुटमणिपुर में स्थापित करेगी. इनकी बिजली उत्पादन क्षमता क्रमश: पांच मेगावाट और 100 मेगावाट होगी.
इस मौके पर बिजली व नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के आयुक्त एएन विश्वास ने बताया कि वर्ष 2011 में बंगाल में सौर ऊर्जा का उत्पादन मात्र दो मेगावाट था, जो अब बढ़ा कर 70 मेगावाट कर दिया गया है. राज्य सरकार ने इसे अगले कुछ वर्षों में बढ़ा कर 200 मेगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इस मौके पर एमसीसीआइ के पूर्व अध्यक्ष हेमंत बांगड़ ने स्वागत भाषण रखा और सेमिनार में पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया.
