मंगलवार को राजभवन में होगा प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह
कोलकाता : हिंदू हॉस्टल के आवंटन को लेकर चल रहे विवाद के मद्देनजर प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह मंगलवार को प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय परिसर में नहीं होकर, राजभवन भवन में होगा. यह पहला अवसर है कि जब किसी भी विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह राजभवन में आयोजित किया गया है. सूत्रों के अनुसार यह दीक्षांत समारोह राजभवन में सुबह 11.30 से दोपहर 12.00 बजे तक होगा. राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी प्रसिद्ध अभिनेता सौमित्र चटर्जी को डीलिट की उपाधि प्रदान करेंगे.
हालांकि छात्रों को दीक्षांत समारोह में डिग्री प्रदान नहीं की जायेगी. उल्लेखनीय है कि सोमवार की सुबह हिंदू हॉस्टल के आवंटन की मांग पर अड़े छात्रों ने प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया. छात्रों की मांग थी कि जब तक होस्टल आवंटित नहीं किया जाता है या हॉस्टल बंद है, तब तक विश्वविद्यालय भी बंद रहेगा.
दीक्षांत समारोह को लेकर सोमवार की सुबह गवर्निंग बॉडी की बैठक थी. उस बैठक में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय की कुलपति अनुराधा लोहिया तथा रजिस्ट्रार देवज्योति कोन्नार पहुंचें, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा रखा था तथा उनलोगों को विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया. द्वार पर खड़ी होकर कुलपति अनुराधा लोहिया ने कहा कि शिक्षक, विभागाध्यक्ष, डीन सभी ने मिलकर निर्णय किया है कि वे लोग यहां खड़े नहीं रहेंगे. वे लोग द्वार बंद कर सकते हैं, उनकी जो इच्छा है, वे करें.
उन्होंने कहा कि वह न तो सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग करेंगी और न ही पुलिस को बुलायेंगी. यह पूरी तरह से गैरकानूनी है. यह किसी तरह से स्वीकार नहीं है. हम शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक वे लोग नहीं हटेंगे, वे लोग क्लास नहीं लेंगे. हिंदू हॉस्टल खोलने के संबंध में श्रीमती लोहिया ने कहा कि वे लोग जो मांग कर रहे हैं, उनके हाथ में नहीं है. हिंदू हॉस्टल का पुनर्निर्माण का काम चल रहा है. जिस दिन पीडब्ल्यूडी उन लोगों को हॉस्टल सौंप देंगे. छात्रों को हॉस्टल आवंटित कर दिया जायेगा.
उन्होंने कहा कि चूंकि आज गवर्निंग बॉडी की बैठक नहीं हो पायी है. इस कारण मंगलवार को छात्रों को डिग्री नहीं दी जा सकेगी. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्थिति में विश्वविद्यालय में पुलिस नहीं प्रवेश करेगी और न ही वह किभी को धक्का देकर विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करेंगी. यदि वे लोग दरवाजा खोल देंगे, तो वह जायेंगी और यदि वे लोग दरवाजा नहीं खोलेंगे, तो वह नहीं जायेगी.
उल्लेखनीय है कि तीन अगस्त से छात्रों ने हिंदू हॉस्टल खोलने की मांग को लेकर प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन शुरू किया है. आंदोलन को तेज करने के लिए छात्रों ने पहले राजारहाट न्यूटाउन कैंपस में अस्थायी हॉस्टल बनाया और उसके बाद कॉलेज स्ट्रीट स्थित परिसर में ही हॉस्टल बना कर रहने लगे. सोमवार को छात्रों ने मुख्य गेट पर ताला ही लगा दिया.
आंदोलनरत छात्र आत्मजीत मुखर्जी का कहना है कि तीन वर्षों से हिंदू हॉस्टल बंद है. छात्र आधा पेट खाकर दो घंटे बीता कर राजारहाट से प्रेसिडेंसी विश्वविद्याल आने के लिए बाध्य थे. हिंदू हॉस्टल आवंटन की तिथि समाप्त होने के बाद उन लोगों ने आंदोलन शुरू किया है. हॉस्टल का पुनर्निर्माण का काम पूरी तरह से समाप्त हो गया है. छात्र चाहते हैं कि उन्हें हॉस्टल वापस दे दिया जाए. इस कारण ही उन लोगों ने निर्णय किया है कि जब तक हॉस्टल बंद रहेगा, तब तक विश्वविद्यालय भी बंद रहेगा.
प्रेसिडेंसी के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि शिक्षण संस्थान किसी कारखाना का गेट नहीं है कि ताला बंद कर दिये और चले गये. वास्तव में राज्य में 34 वर्षों से यही राजनीति चल रही थी. अभी तक उसके प्रभाव से ये निकल नहीं पाये हैं. हॉस्टल के संबंध में उनकी साफ राय है कि मानवीय दृष्टि से इसे हल करना होगा तथा जितना जल्दी हो सके. छात्रों को हॉस्टल आवंटित किया जायेगा.
