कोलकाता
. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाला वाममोर्चा राज्य विधानसभा चुनाव में युवाओं को अपने पक्ष में वापस लाने के लिए रोजगार सृजन को प्रमुख मुद्दा बना रहा है. माकपा केंद्रीय समिति के सदस्य शमिक लाहिड़ी ने कहा कि पार्टी इस चुनाव में बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवारों और स्वयंसेवकों के सहारे नयी पीढ़ी का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है. राज्य में पिछले कुछ चुनावों में युवाओं के बीच समर्थन में भारी गिरावट वाम दलों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है. उन्होंने कहा : हमारे चुनाव प्रचार का मुख्य आधार रोजगार सृजन है.जल्द जारी होगा वामो का घोषणा-पत्रशमिक लाहिड़ी ने कहा कि राज्य में रोजगार के अवसरों की भारी कमी है और बेरोजगारी के कारण लगभग 1.25 करोड़ लोग (जिनमें अकुशल से लेकर अत्यधिक कुशल लोग शामिल हैं) राज्य छोड़ चुके हैं. माकपा नेता ने बताया कि वाममोर्चा ने राज्य के लिए एक वैकल्पिक रोजगार नीति तैयार की है, जिसे विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में पेश किया जायेगा. उन्होंने कहा कि वाममोर्चा का घोषणा पत्र अंतिम चरण में है और जल्द ही जारी किया जायेगा, जिसमें रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गया है. साल 2011 में तत्कालीन विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के आंदोलनों के चलते सात कार्यकाल वाली वाममोर्चा सरकार का पतन हुआ था. मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली सरकार को 2007-08 के दौरान किसानों की जमीन वापसी की मांग को लेकर तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा था. इसके चलते टाटा मोटर्स ने सिंगूर से अपनी नैनो कार परियोजना को गुजरात के साणंद स्थानांतरित कर दिया था और नंदीग्राम में प्रस्तावित रासायनिक हब योजना भी रद्द करनी पड़ी थी.
वामो ने अब तक की है 224 प्रत्याशियों के नामों की घोषणाश्री लाहिड़ी ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के नाम घोषित हो चुके हैं, वे पूरी ताकत के साथ प्रचार में जुट गये हैं और घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं. बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा की 224 सीटों पर वाम मोर्चा अब तक उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है.
वामो को 2011 में 39%, तो 2021 में मिले 4.73% वोटगौरतलब है कि 2011 में वाममोर्चा को 39 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 4.73 प्रतिशत रह गया. 2024 के लोकसभा चुनाव में माकपा को 5.73 प्रतिशत वोट मिले. श्री लाहिड़ी ने कहा कि पार्टी पारंपरिक तरीके से घर-घर जाकर प्रचार और मतदाताओं से संवाद पर जोर दे रही है. उन्होंने बताया कि बड़े जनसभाओं के बजाय छोटे-छोटे स्थानीय बैठकों और व्यक्तिगत संपर्क के जरिये आम लोगों तक पहुंचने की रणनीति अपनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि माकपा अब तक राज्यभर में 70 हजार से अधिक छोटी बैठकों का आयोजन कर चुकी है और मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क के जरिये समर्थन वापस पाने की कोशिश कर रही है.
