कोलकाता : लगभग दो साल पहले सितंबर माह में कोलकाता के पाथुरिया घाट में जर्जर बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से दो की जान गयी थी. उसके ठीक एक साल बाद ही टाला में फिर एक जर्जर इमारत का हिस्सा गिरने से एक युवती की मौत हुई थी. इन दोनों घटना के बाद तीसरी घटना सोमवार को सियालदह के बैठकखाना रोड में हुई, जहां जर्जर इमारत का हिस्सा गिरने से दो लोगों की जान चली गयी.
लेकिन इस दरमियान जर्जर इमारतों को किसी तरह से तोड़ कर बनवाने (चाहे वह मकान मालिक बनवाये अथवा केएमसी की ओर से डेवलपर को देकर बनावाया जाये) और किरायेदार व मकान मालिकों के बीच की समस्याओं को सुलझाने से संबंधित मामलों के लिए बनाया गया कोलकाता नगर निगम (केएमसी) का नया कानून जमीन हकीकत से कोसों दूर दिख रहा है.
ऐसा ही आरोप माकपा पार्षद रत्ना राय मजूमदार ने भी लगाया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जर्जर इमारतों के लिए जो नया कानून बनाये गये हैं. उसमें काफी जटिलता है, इसे लेकर पहले भी निगम की बैठक के दौरान भी मुद्दा को उठाया था लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया. उन्होंने कहा कि निगम की लापरवाही, निगरानी का अभाव और जटिल नये नियमों के कारण ही फिर इस तरह की घटना से दो लोगों की जान गयी.
अगर निगम तत्परता दिखाता तो दोनों की जान बच सकती थी. इधर कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी ने बताया कि पाथुरिया घाट की घटना के बाद से ही नया कानून बनाया गया. नियमों के मुताबिक कई जगह काम किये जा रहे है. इस घटना में से पहले ही नोटिस दिया गया था. मकान को भी खतरनाक घोषित कर दिया गया था लेकिन लोगों में भी जागरूकता होना जरूरी है. कई जगहों पर खुद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर जर्जर मकानों में रह रहे हैं.
