कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी के 20 छात्रों द्वारा अब भी भूख हड़ताल जारी है. इन छात्रों ने अपनी मांग मनवाने के लिए आमरण अनशन जारी रखने का फैसला किया है. इन छात्रों के समर्थन में छात्र यूनियनों के सदस्य भी धरने पर बैठे हुए हैं. हालांकि शनिवार को वाइस चांसलर ने काफी भारी मन से छात्रों को भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की लेकिन छात्र इसको मानने के लिए तैयार नहीं हैं.
छात्रों का कहना है कि यह केवल एडमिशन टेस्ट की बात नहीं है बल्कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक स्वायत्ता की महत्ता का भी सवाल है. एकेडमिक कार्यों में दखल किया जा रहा है.
रविवार को भी छात्र आंदोलन पर जमे रहे. उनका कहना है कि हम नहीं चाहते हैं कि वाइस चांसलर त्यागपत्र दे दें, लेकिन कोई फाइनल निर्णय लेना होगा. 17,000 छात्रों के भविष्य के सवाल से जुड़ा है. स्नातक स्तर पर आट्स कोर्स के लिए एडमिशन टेस्ट का कोई विकल्प होना चाहिए. आट्स फैकल्टी स्टूडेंटस यूनियन के चैयरपर्सन का कहना है कि शीघ्र फैसला होना चाहिए. केपीसी मेडिकल कॉलेज एंड होस्पीटल की एक मेडिकल टीम भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य की खबर लेने के लिए पहुंची. गाैरतलब है कि वर्तमान मुद्दे को लेकर एक रिपोर्ट राज्यपाल व चांसलर केशरीनाथ त्रिपाठी के पास भेजी गयी है. अब इस पर क्या फैसला होता है, इसका सभी को इंतजार रहेगा. जवाब आने तक छात्रों को भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए कहा गया लेकिन इस अपील को ठुकरा दिया गया. उनका कहना है कि वे भूख हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे.
जादवपुर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार चिरंजीव भट्टाचार्य का कहना है कि इसमें राज्यपाल क्या जवाब जेते हैं, इस पर आगे की कार्रवाई होगी. सोमवार को फिर से एक आपातकालीन एक्जिक्यूटिव काउंसिल की बैठक बुलायी गयी है.
इस मामले में एएफएसयू की अध्यक्ष सोमाश्री चौधरी ने कहा कि छह जुलाई की देर रात से ही चल रही कला संकाय के 20 छात्रों की बेमियादी भूख हड़ताल जारी रहेगी, क्योंकि कार्यकारी परिषद का फैसला वापस लेने की समय सीमा आज दोपहर 12 बजे तक थी. हम कल सुबह एक बैठक में अपने भविष्य के कदम पर फैसला करेंगे. कक्षा के बहिष्कार पर भी विचार किया जाएगा.
हमारी मांगें पूरी होने तक भूख हड़ताल जारी रहेगी. वहीं यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के नौ शिक्षकों ने रविवार को कुलपति को एक पत्र सौंपकर कहा कि वे संकाय सदस्यों के तौर पर प्रवेश प्रक्रिया से खुद को अलग करना चाहते हैं. इससे पहले, अंग्रेजी विभाग और तुलनात्मक साहित्य विभाग के शिक्षकों ने भी प्रवेश प्रक्रिया से दूर रहने की इच्छा व्यक्त की थी.
