कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राज्य भर में सहकारिता बैंक व समितियों की पहुंच राज्य के हर एक गांव में पहुंचाना चाहती हैं. साथ ही को-आॅपरेटिव बैंकों का कम्यूटरीकरण और इसे आधुनिक बैंकिंग सेवाओं से लैस करने की योजना बनायी गयी है. शनिवार को सहकारिता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीटर के माध्यम से कहा कि राज्य सरकार ने राज्य के 2600 सहकारिता समितियों को बैंक का दर्जा देने जा रही है.
इन्हें बैंक का दर्जा देने से को-ऑपरेटिव बैंकों में जमा राशि के परिणाम में भी वृद्धि होगी. अगले तीन वर्ष में सहकारिता बैंकों में जमा राशि के परिमाण को एक लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है. जमा राशि में वृद्धि होने से को-ऑपरेटिव बैंकों के माध्यम से किसानों को फसल उत्पादन के लिए और अधिक लोन भी प्रदान किया जायेगा.
बैंक विहीन गांवों में खुलेगी नयी शाखा : विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 को अंत तक बैंक विहीन ग्राम पंचायतों में कम से कम 75 सहकारी बैंक शाखाएं खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया है. अभी मौजूदा सहकारी बैंकों में आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं, जैसे एटीएम, आरटीजीएस, एनइएफटी आदि उपलब्ध करायी जा रही हैं.
अब तक पश्चिम बंगाल राज्य सहकारिता बैंक (डब्ल्यूबीएससीबी) और केंद्रीय सहकारिता बैंक (सीसीबी) की 350 शाखाएं पहले ही सीबीएस-सक्षम रही हैं और इसके अलावा 80 नयी एटीएम चलन में लाया गया. इसके साथ-साथ 2,780 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) के कम्प्यूटरीकरण के लिए 34.75 करोड़ रुपये की सहायता दी गयी है.राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में छह नये कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें कुल क्षमता 49,000 मीट्रिक टन है, जो चालू वर्ष के दौरान पूरी होने की संभावना है.
