बांकुड़ा में हेयर डोनेशन कैंप

हेयर डोनेशन को लेकर भी एक तरह की जागरूकता बढ़ती दिख रही है. कैंसर मरीजों के लिए हेयर डोनेशन का चलन बढ़ रहा है.

महिलाओं के लिए लगाये जा रहे हैं हेयर डोनेशन कैंप भीप्रणव कुमार बैरागी, बांकुड़ा

माना जाता है कि महिलाओं को उनके बाल बेहद प्रिय होते हैं. ऐसे में अगर वे अपने बाल का दान कर रही हों, तो समझा जा सकता है कि ऐसा वे किन परिस्थितियों में ऐसा कर रही हैं और यह दान उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है. रविवार को बांकुड़ा में ऐसा देखा गया. बांकुड़ा में जिस प्रकार रक्तदान शिविर के आयोजन में तेजी दिखी है. इससे ब्लड बैंकों में रक्त की किल्लत को कुछ हद तक कम करने में सफलता मिली है. ठीक इसी तरह यहां हेयर डोनेशन को लेकर भी एक तरह की जागरूकता बढ़ती दिख रही है. कैंसर मरीजों के लिए हेयर डोनेशन का चलन बढ़ रहा है. व्यक्तिगत रूप से हो या संस्थाओं के माध्यम से, महिलाएं कैंसर मरीजों के लिए हेयर डोनेशन करने को आगे आ रही हैं. ऐसा एक नजारा रविवार को भी देखने को मिला. बांकुड़ा शहर के कृषक बाजार में हेयर डोनेशन का एक कार्यक्रम हुआ. यहां ‘नव दिशाएं मातृभूमि’ नामक संस्था की तरफ से रक्तदान के साथ-साथ एक हेयर डोनेशन कैंप भी लगाया गया था. संस्था की सदस्य ब्रतती बनर्जी का कहना था कि इससे पहले उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कैंसर मरीजों के लिए हेयर डोनेट किया था. एक मरीज में कैंसर होने का पता चलने पर शुरू होने वाले इलाज के चलते उसके बालों का झड़ना शुरू हो जाता है. पीड़िता को भीतर ही भीतर हताशा झेलनी पड़ती है. हेयर फॉल या कहें बालों का झड़ना इस हताशे को एक नयी ऊंचाई पर पहुंचा देता है. पर, अगर कैंसर से राहत मिलने की स्थिति में पीड़िता के बाल भी पुन: मिल जायें, तो बात कितनी अच्छी हो.

लेकिन स्वत: ऐसा हो नहीं पाता. उसे विग का सहारा लेना पड़ता है. इसके जरिये भी उसे काफी राहत मिलती है, क्योंकि उसके बाल उसके सौंदर्य और व्यक्तित्व बोध के अभिन्न हिस्सा होते हैं. श्रीमती बनर्जी ने बताया कि उन लोगों द्वारा दान किये गये बाल से विग बनाया जायेगा, जो महिला कैंसर पीड़ितों के लिए होगा. कैंसर से बाल खोने वाली महिलाओं को हम भी चाहते हैं मदद करना : हेयर डोनेट करने वाली प्रीति चक्रवर्ती कहती हैं कि महिला कैंसर मरीजों की हम भी किसी न किसी तरह थोड़ी मदद कर ही सकते हैं. हम उन्हें विग देकर ही मदद करना चाहते हैं. इसके लिए पीड़िताओं के हित में हम अपने बाल दान कर रहे हैं. इससे हमें आत्मिक प्रसन्नता और संतोष मिलता है. विष्णुपुर के ‘चलो एगिये आशी’ नामक एक अन्य संस्था की सचिव इंदिरा बनर्जी के मुताबिक, वह 2020 से हेयर डोनेशन के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं. अभी तक 200 लोगों ने उनकी संस्था के माध्यम से हेयर डोनेशन किया है. भविष्य में भी हेयर डोनेशन का कार्यक्रम जारी रहेगा.

एक छोटा-मोटा वरदान ही है हेयर डोनेशन भी :हेयर डोनेशन के बारे में विशिष्ट समाजसेवी एवं लायंस क्लब ऑफ बांकुड़ा के सदस्य शुभम बनर्जी की राय में जहां लोग रक्तदान करते हैं, अंग दान करते है, वहीं हेयर डोनेशन भी कैंसर मरीजों के लिए एक तरह का छोटा-मोटा वरदान ही है. इस बारे में चिकित्सक डॉ अरिंदम घोष का कहना है कि हेयर डोनेशन एक अत्यंत सराहनीय कार्य है. इसके लिए थोड़ी जागरूकता जरूरी है. जागरूक महिलाओं को हेयर डोनेशन के लिए आगे आना चाहिए.

बाल खोने की वजह से मानसिक रूप से टूटी होती हैं महिलाएं :हेयर डोनेशन के जरिये हासिल बालों को कैंसर मरीजों के लिए विग बनाने के काम में लाया जाता है. जिले में हेयर डोनेशन का चलन उतना नहीं दिखता है जितना रक्तदान के प्रति है. इसलिए संस्थाओं की ओर से हेयर डोनेशन को लेकर भी कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. कैंसर मरीजों के बाल झड़ जाने से विशेषकर महिलाएं मानसिक रूप से टूट जाती हैं. इसलिए खासकर महिलाओं से ही कैंसर मरीजों के लिए हेयर डोनेशन कराया जाता है.

कैंसर पीड़ितों के लिए मुंबई में बनाये जाते हैं विग

आयोजकों का कहना है कि ऐसे पुनीत कार्य के लिए लोगों को जागरूक होना होगा. ये लोग जल्दी ही एक और हेयर डोनेशन कैंप करेंगे. ब्रतती बनर्जी के अनुसार, मुंबई की एक संस्था द्वारा महिलाओं के लिए विग तैयार किया जाता है. उसी संस्था को यहां दान हुए बाल भेज दिये जाते हैं. हेयर डोनेट करने वाली महिलाओं को मुंबई की संस्था दान के बदले प्रमाण-पत्र प्रदान भी देती है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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