आसनसोल नगर निगम के वार्ड 10 के निघा स्टाफ क्लब के पीछे का इलाका इन दिनों डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुका है. देश के सबसे गंदे शहरों की सूची में आसनसोल का नाम आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर भी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. आलम यह है कि निघा क्षेत्र के लोग पिछले एक महीने से गंदगी व दुर्गंध के बीच रहने को मजबूर हैं.
घरों में घुस रहे कीड़े, महामारी का खतरा : नुमान अफसर
संगठन ””आवाज”” के जिला सचिव नुमान अफसर खान ने एक लिखित बयान जारी कर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है उन्होंने कहा की पिछले एक महीने से निघा क्षेत्र में सफाई का काम पूरी तरह बंद पड़ा है. नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं, जिसके कारण कीड़े-मकोड़े नालियों के रास्ते लोगों के घरों में घुस रहे हैं. गंदगी के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है. नुमान अफसर खान ने आसनसोल नगर निगम के मेयर और जामुड़िया बोरो चेयरमैन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने अपील की है कि युद्ध स्तर पर मजदूर लगाकर पूरे वार्ड की सफाई करायी जाये.
इसीएल और जनता पर पार्षद प्रतिनिधि का पलटवार
इन गंभीर आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए वार्ड संख्या 10 के पार्षद प्रतिनिधि भोला पासवान ने सफाई न होने के आरोपों को निराधार बताया.उन्होंने इस स्थिति के लिए दो मुख्य कारण गिनाते हुवे दावा किया कि कुछ समय पहले जब सफाई का मुद्दा उठा था, तब ईसीएल ने कहा था कि जिस इलाके में उनके श्रमिक रहते हैं, वहां की सफाई इसीएल खुद करायेगा. इसी आश्वासन के आधार पर निगम ने वहां काम बंद किया था. उन्होंने कहा कि जहां जरूरत होती है, वहां समय पर सफाई की जा रही है. लेकिन स्थानीय लोगों की भी गलती है; डस्टबिन होने के बावजूद लोग सड़कों पर कचरा फेंक देते हैं, जिससे गंदगी फैलती है. पार्षद प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया है कि वे इस समस्या की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को जरूर देंगे ताकि इसका स्थायी समाधान निकाला जा सके.
सफाई सर्वेक्षण की रैंकिंग बनी चर्चा का विषय
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में आसनसोल का नाम देश के चुनिंदा गंदे शहरों में शामिल होना बेहद अफसोसजनक है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि निघा जैसे इलाकों की अनदेखी ही शहर की रैंकिंग खराब होने का मुख्य कारण है.नगर निगम को तत्काल नींद से जागना होगा. सफाई कर्मचारियों की कमी का बहाना बनाकर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.