पुरुलिया के सांतुड़ी में सड़क के चलते दो स्पंज आयरन कारखाने बंदी के कगार पर

सड़क की समस्या को लेकर जिला के सांतुड़ी थाना क्षेत्र में दो स्पंज आयरन कारखाने बंदी के कगार पर हैं. दुर्गापूजा से पहले कारखाने के बंद होने की आशंका से हजारों मजदूर लगातार प्रशासनिक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.

पुरुलिया.

सड़क की समस्या को लेकर जिला के सांतुड़ी थाना क्षेत्र में दो स्पंज आयरन कारखाने बंदी के कगार पर हैं. दुर्गापूजा से पहले कारखाने के बंद होने की आशंका से हजारों मजदूर लगातार प्रशासनिक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. दोनों स्पंज आयरन फैक्टरी के वाहन सांतुड़ी थाना क्षेत्र के जगन्नाथडी गांव से होकर गुजरते हैं. लेकिन इस रास्ते पर हुए हादसों में कुछ जानें चली गयी हैं. इसके चलते स्थानीय लोगों ने कई बार यहां से वाहनों की आवाजाही बंद करने के लिए आंदोलन किया, लेकिन प्रशासन के आश्वासन से गाड़ियां गुजरती रहीं. कारखाना के अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर वैकल्पिक रास्ता बनाने का भी प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन समय-सीमा बीत गयी, पर वैकल्पिक मार्ग नहीं बना. इसके बाद स्थानीय लोगों ने गांव से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है. इससे अब इन कारखानों में कच्चे माल की किल्लत पैदा होने लगी है.

इस बीच, एक कारखाना में कार्य-स्थगन का नोटिस चस्पा कर दिया गया है. दूसरा कारखाना भी जल्द ही बंद होने के कगार पर है. इसे लेकर दोनों कारखानाओं के हजारों मजदूर लगातार प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. मजदूरों की मांग है कि हजारों कामगारों के हित में प्रशासन मसले का जल्द हल करने की दिशा में कदम उठाये. दुर्गापूजा से पहले कारखाना बंद हो गया, तो हजारों मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे. उक्त मसले पर मंगलवार को रघुनाथपुर अनुमंडल अधिकारी कार्यालय में प्रशासन के साथ उक्त कारखाना के अधिकारियों और स्थानीय जगन्नाथ गांव के बाशिंदों व मजदूरों की एक बैठक हुई. रघुनाथपुर के अनुमंडल अधिकारी तमिल ओभिया एस ने कहा कि बदहाल रास्ते को लेकर कुछ दिक्कतें हुई थीं. कारखाने के अधिकारियों को वैकल्पिक रास्ता जल्द बनाने को कहा गया है. इस पर सबकी सहमति भी है. फिलहाल पुराने रास्ते से ही संभल कर वाहनों को यातायात करना होगा. जल्द वैकल्पिक रास्ता ढूंढ कर कारखाना अधिकारियों को रास्ता बनाना होगा. अलबत्ता, कारखाना के अधिकारियों ने कहा कि वैकल्पिक मार्ग के लिए लगातार स्थानीय लोगों से चर्चा की जा रही है. भूमि नहीं मिलने से वैकल्पिक रास्ता नहीं बन पा रहा है.

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