मंत्री मलय घटक के नेतृत्व में डीवीसी के मैथन कार्यालय के सामने तृणमूल ने किया प्रदर्शन, प्रबंधन को सौंपा ज्ञापन

टकराव. जानबूझकर मानव जीवन को हानि पहुंचाने का आरोप, उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठन की मांग

दक्षिण बंगाल के विभिन्न जिलों में बाढ़ के लिए डीवीसी प्रबंधन को बताया जिम्मेदार, आंदोलन में जामुड़िया, रानीगंज, पांडवेश्वर के विधायक और जिला परिषद के सभाधिपति भी रहे शामिल आसनसोल. डीवीसी के मैथन और पंचेत डैम से पश्चिम बंगाल सरकार को पूर्व सूचना दिये बगैर मनमाने ढंग से भारी मात्रा में पानी छोड़ने के कारण जानबूझकर लोगों की जीवन हानि का प्रयास किया गया, इसकी उच्च स्तरीय जांच सहित छह सूत्री मांगों को लेकर राज्य के श्रम, विधि व न्याय मंत्री मलय घटक के नेतृत्व में मंगलवार को तृणमूल के नेता व कार्यकर्ताओं ने मैथन (झारखंड) में स्थित डीवीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और परियोजना प्रमुख को ज्ञापन सौंपा. मंत्री श्री घटक ने कहा कि डीवीसी के पानी से किसानों का फसल बुरी तरह बर्बाद हुई है, राज्य की सड़कें तबाह हो गयीं हैं, लोग त्रस्त हैं. पंचेत में भी डीवीसी कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया जायेगा. डीवीसी मैथन परियोजना प्रमुख सह कार्यकारी निदेशक (सिविल) सुमन प्रसाद सिंह ने कहा कि सेंट्रल वाटर कमीशन के एडवाइस पर ही डैम से पानी छोड़ा जाता है और इसकी पूर्व सूचना पश्चिम बंगाल और झारखंड राज्य के आधिकारियों को छह घंटा पहले भेज दी जाती है. आंदोलन में मंत्री श्री घटक के साथ पश्चिम बर्दवान जिला परिषद के सभाधिपति विश्वनाथ बाउरी, पांडवेश्वर के विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती, जामुड़िया के विधायक हरेराम सिंह, रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी, आसनसोल नगर निगम के उपमेयर अभिजीत घटक सहित भारी संख्या नेता व कार्यकर्ता उपस्थित थे.

ज्ञापन में क्या रहा छह सूत्री मुद्दा?

ज्ञापन में कहा गया कि पश्चिम बंगाल एक तटवर्ती राज्य है और उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड का सारा पानी अंततः बंगाल में पहुंचता है. उपरोक्त कारकों को ध्यान में रखते हुए डीवीसी ने बांधों की योजना और डिजाइन पश्चिम बंगाल को दामोदर नदी के बाढ़ से बचाने के लिए बनायी. डीवीआरआरसी के नियमावली और दिशानिर्देशों के अनुसार, डीवीसी बांधों से पानी छोड़ने से पहले पश्चिम बंगाल राज्य से पहले परामर्श करेगा. यह देखा गया कि 26 अप्रैल 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बनी सहमति के बाद भी 50 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में कोई परामर्श नहीं किया गया. डीवीसी बाढ़ भंडारण सहित बांधों में उपलब्ध जल संचयन क्षमता का भी उपयोग नहीं करता है, जिससे राज्य को मानसून के दौरान राहत मिल सकती थी. राज्य सरकार और माननीय मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर डीवीसी से भंडारण क्षेत्र की ड्रेजिंग करने का अनुरोध किया गया है. जिससे बांधों की क्षमता 35 से 40 फीसदी कम हो चुकी है. इससे राज्य को मानसून के दौरान राहत मिल सकती थी.

23 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने पर छह घंटा पहले दी जाती है सूचना

मैथन परियोजना प्रमुख श्री सिंह ने कहा कि सेंट्रल वाटर कमीशन की सलाह पर डीवीसी पानी छोड़ती है. पानी छोड़ने के पहले उसकी एक प्रक्रिया निर्धारित की गयी है. उस प्रक्रिया के तहत पूर्व सूचना संबंधित सभी को दी जाती है. एक सक्रिय व्हाट्सएप ग्रुप है, जिसमें बंगाल सरकार सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्य अभियंता, झारखंड सरकार के प्रतिनिधि, डीवीसी के प्रतिनिधि शामिल हैं. इसमें सारी सूचना तुरंत भेज दी जाती है, इसके अलावा ईमेल भी भेजा जाता है. राज्य के मुख्य सचिव की उपस्थिति में इस साल अप्रैल में जो बैठक हुई थी, उसमें बताया गया था कि लोअर वैली की चैनल कैरिंग कैपासिटी 1.30 लाख क्यूसेक है. इसलिए सीडब्यूसी के एडवाइस पर 70 हजार क्यूसेक से अधिक पानी नहीं छोड़ा गया. एक-दो परिस्थितियों के 72 से 75 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था. उन्होंने बताया कि 23 हजार क्यूसेक तक पानी छोड़ना फ्लड रिलीज नहीं माना जाता है. इससे अधिक पानी छोड़ने की सूचना सभी को छह घंटे पहले ही दे दी जाती है. मैथन और पंचेत के छोड़ा गया पानी दुर्गापुर बैरेज में 12 घंटे के बाद पहुंचता है. ऐसे में 18 घंटे पहले सूचना मिल जाती है. नियम के अनुसार ही पानी छोड़ा जाता है.

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