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Shatrughan Sinha Missing Posters| आसनसोल, संतोष विश्वकर्मा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच औद्योगिक नगरी आसनसोल का सियासी पारा अचानक गरमा गया है. आसनसोल के वार्ड संख्या 78 अंतर्गत केएस टाइप इलाके में बिहारी बाबू के नाम से मशहूर स्थानीय सांसद शत्रुघ्न सिन्हा के ‘लापता’ होने के पोस्टर चिपकाये गये हैं. इन पोस्टरों के सामने आने के बाद इलाके में राजनीतिक हड़कंप मच गया है. ‘आसनसोल सिटीजन फोरम’ के नाम से लगाये गये इन पोस्टरों में सांसद की अनुपस्थिति और क्षेत्र के विकास की कमी को लेकर तीखा हमला बोला गया है.
पोस्टर पर लिखा- धिक्कार है ऐसे संसद पर
इलाके की दीवारों पर चस्पा पोस्टरों में लिखा है- शर्म की बात है. आसनसोल के सांसद विलुप्त हो गये हैं. 2026 विधानसभा चुनाव के दौरान विकास कहां है? धिक्कार ऐसे सांसद पर.
- जनता की नाराजगी या राजनीति : विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है. विपक्ष का कहना है कि यह पोस्टर जनता की उस नाराजगी का प्रतीक है, जो सांसद के अपने क्षेत्र से दूर रहने के कारण पैदा हुई है.
- स्थानीय चर्चा : केएस टाइप इलाके में यह मामला अब लोगों के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गया है. कुछ लोग इसे राजनीतिक स्टंट कह रहे हैं, तो कुछ इसे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जोड़ रहे हैं.
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TMC का पलटवार : सांसद सक्रिय, यह भाजपा का दुष्प्रचार
तृणमूल कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की ‘गंदी राजनीति’ करार दिया है. आसनसोल साउथ ब्लॉक टाउन टीएमसी के ब्लॉक अध्यक्ष पूर्णेंदु चौधरी ने कहा कि यह पूरी तरह से विरोधियों का दुष्प्रचार है. भाजपा और अन्य विपक्षी दल हार के डर से ऐसी साजिशें रच रहे हैं.
- सांसद की सक्रियता : पूर्णेंदु चौधरी ने दावा किया कि शत्रुघ्न सिन्हा लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं. विकास कार्यों व राजनीतिक गतिविधियों को लेकर मंथन करते रहते हैं.
- सिटीजन फोरम पर सवाल : उन्होंने कहा कि ‘आसनसोल सिटीजन फोरम’ के नाम पर कोई भी इस तरह के पोस्टर लगा सकता है. इसके पीछे भाजपा का हाथ होने की पूरी संभावना है.
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Shatrughan Sinha Missing Posters: चुनाव से पहले बढ़ती तपिश
विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चल रहे प्रचार के बीच इस तरह के पोस्टर विवाद ने तृणमूल कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में डाल दिया है. आसनसोल उत्तर और दक्षिण दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गर्मी बढ़ गई है. अब देखना यह है कि आगामी चुनावी रैलियों में सांसद खुद इन आरोपों का जवाब कैसे देते हैं.
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