जिन 12 की नागरिकता पर दर्ज थी आपत्ति, लाये पासपोर्ट

मतदाता-सूची को लेकर चल रहे समरी रिवीजन के कार्य के तहत फॉर्म-7 की सुनवाई के दौरान शनिवार को आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के एनसी लाहिड़ी स्कूल में भारी हंगामा हुआ.

आसनसोल.

मतदाता-सूची को लेकर चल रहे समरी रिवीजन के कार्य के तहत फॉर्म-7 की सुनवाई के दौरान शनिवार को आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र के एनसी लाहिड़ी स्कूल में भारी हंगामा हुआ. आसनसोल नगर निगम के वार्ड 31 में रहनेवाले 12 लोगों के खिलाफ उनके भारतीय नागरिक नहीं होने को लेकर फॉर्म-7 के तहत सुनवाई में बुलाया गया था, सारे लोग भारतीय नागरिक होने का प्रमाण लेकर पहुंचे, जिनमें आठ लोग पासपोर्ट लेकर आये थे. सुनवाई में पहुंचे ये लोग शिकायतकर्ताओं को बुलाने की मांग पर अड़ गये और हंगामा होने लगा. भारी पुलिस बल और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी पहुंचे. लोगों का कहना था कि ऐसी झूठी शिकायत करके लोगों को परेशान किया जा रहा है. झूठी शिकायत के आधार पर सब काम छोड़ कर घंटों लाइन में लग कर अपनी नागरिगता साबित करनी पड़ रही है. इससे पहले एसआइआर को लेकर परेशानी झेलनी पड़ी, अब फॉर्म-7 लेकर समस्या हो रही रही है. शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. तृणमूल के प्रदेश सचिव वी शिवदासन दासू ने आरोप लगाया कि भाजपा के लोगों ने मुस्लिमों को निशाना बना कर ऐसे झूठे आरोप लगा कर फॉर्म-7 जमा किया है, जिसका तृणमूल विरोध कर रही थी. इआरओ को इस पर एक्शन लेना होगा. सुनवाई में सिर्फ वह व्यक्ति परेशान नहीं हो रहा है, पूरा तंत्र परेशान हो रहा है.

क्या है पूरा मामला

शनिवार को एनसी लाहिड़ी स्कूल के 12 लोगों को भारतीय होने का प्रमाणपत्र के साथ सुनवाई में बुलाया गया था. ये 12 लोग पहुंचे और अपना प्रमाणपत्र दिखाया. जिसमें महिलाएं भी शामिल थी. इनलोगों का कहना है कि झूमा दत्त, दिनेश कुमार लाल और उत्पल दत्त नामक तीन लोगों ने इन 12 लोगों के खिलाफ भारतीय नागरिक नहीं होने का आरोप लगाकर फॉर्म सात में आपत्ति दर्ज करायी. उन्हें भी सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए नोटिस भेजा गया था. वे लोग नहीं आये. उन्हें आकर साबित करना था कि उनका आरोप सही है. इस तरह झूठा आरोप लगाकर लोगों को परेशान कर रहे हैं.

झूठा आरोप लगाने पर एक साल की कैद व जुर्माना की सजा का प्रावधान

फॉर्म सात में गलत सूचना देने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (1950 का 43) की धारा 31 के तहत दंडनीय अपराध है और इसकी सजा एक साल की कैद या जुर्माना दोनों हो सकता है. इसके लिए पीड़ित को पूरे मामले को लेकर इआरओ के पास शिकायत करना होगा. यदि उसपर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो पीड़ित अदालत में अपील कर सकता है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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