बांकुड़ा विस सीट पर कांटे की टक्कर कम फर्क की जीत का अतीत चुनौती, बदले समीकरण

जिले के बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र में इस बार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर के आसार हैं.

प्रणव बैरागी, बांकुड़ा.

जिले के बांकुड़ा विधानसभा क्षेत्र में इस बार तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर के आसार हैं. पिछले दो चुनावों में बेहद कम अंतर से जीत होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से सबसे ज्यादा चर्चित बन गयी है. जिला मुख्यालय होने के कारण यहां सभी प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय, जिला अदालत और अस्पताल स्थित हैं, जिससे यह सीट सभी दलों के लिए अहम है. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीलाद्रि शेखर दाना ने 0.7 प्रतिशत यानी 1468 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी. उन्हें 44.72 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी तृणमूल की सायंतिका बनर्जी को 44.06 प्रतिशत वोट मिले. कांग्रेस को 6.4 प्रतिशत वोट मिले थे. इससे पहले 2016 में वाम समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार शंपा दरीपा ने 1029 वोट से जीत हासिल की थी.

चुनाव मैदान में नये व पुराने चेहरे

इस बार भाजपा ने नीलाद्रि शेखर दाना को फिर से उम्मीदवार बनाया है. वहीं तृणमूल कांग्रेस ने नए चेहरे के रूप में प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ अनूप मंडल को मैदान में उतारा है, जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुए हैं. माकपा की ओर से अभयानंद मुखर्जी, जो अभयदा के नाम से जाने जाते हैं, मैदान में हैं. कांग्रेस ने वकील अरूप मुखर्जी को उम्मीदवार बनाया है.

चुनावी रणनीति व वोट बैंक पर नजर

राजनीतिक हलकों में इस बात पर नजर है कि क्या भाजपा पिछली बढ़त बरकरार रख पाएगी या तृणमूल विकास कार्यों के आधार पर वापसी करेगी. माकपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी समीकरण बदलने की स्थिति में हैं. खासकर अभयानंद मुखर्जी के प्रचार को देखते हुए उनके वोट शेयर पर सबकी नजर है.

इतिहास से कड़ी टक्कर के संकेत

2011 में तृणमूल के काशीनाथ मिश्र ने 29090 वोट से बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन इसके बाद से हर चुनाव में जीत का अंतर लगातार कम होता गया है. 2016 और 2021 में बेहद कम अंतर ने यह संकेत दिया है कि इस बार भी मुकाबला बेहद करीबी रहने की संभावना है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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