अस्पताल से करिश्मा ने दी माध्यमिक परीक्षा

कड़ी निगरानी और चिकित्सा सहायता के बीच करिश्मा ने अपना पूरा पेपर हल किया.

रानीगंज. माध्यमिक परीक्षा के तनावपूर्ण माहौल के बीच मंगलवार को रानीगंज से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के आगे बड़ी से बड़ी बाधा भी घुटने टेक देती है. वल्लभपुर रघुनाथ चक हिंदी हाई स्कूल की छात्रा करिश्मा कुमारी साव ने आज अपने फौलादी इरादों से यह दिखा दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो अस्पताल का बेड भी रास्ता नहीं रोक सकता.

परीक्षा केंद्र में अचानक बिगड़ी तबीयत : जानकारी के अनुसार, रानीगंज के बासंती देवी गोयनका विद्यामंदिर स्कूल में परीक्षा देने पहुँची करिश्मा को परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद अचानक असहजता महसूस होने लगी. देखते ही देखते उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत आलुगोड़िया स्तिथ सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया.

अस्पताल पहुँचने पर एक पल को ऐसा लगा कि शायद करिश्मा इस साल की अपनी मेहनत को अंजाम तक नहीं पहुँचा पाएंगी, लेकिन पिता रामशरण साव की इस साहसी बेटी ने हार मानने से इनकार कर दिया. प्राथमिक उपचार के बाद, छात्रा ने परीक्षा देने की इच्छा जताई. इसके बाद प्रशासन और स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों के सहयोग से करिश्मा के लिए अस्पताल के बेड पर ही विशेष व्यवस्था की गयी. कड़ी निगरानी और चिकित्सा सहायता के बीच करिश्मा ने अपना पूरा पेपर हल किया.

शिक्षकों व प्रशासन ने जज्बे को सराहा : दर्द और बीमारी के बावजूद करिश्मा के इस समर्पण ने न केवल स्वास्थ्य कर्मियों बल्कि शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का भी दिल जीत लिया.शिक्षकों का कहना है कि करिश्मा का यह कदम अन्य छात्रों के लिए एक बड़ी मिसाल है. विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि हमें गर्व है कि हमारे स्कूल की छात्रा ने अपनी बीमारी को अपने भविष्य के आड़े नहीं आने दिया.करिश्मा की हिम्मत ने साबित कर दिया कि सफलता केवल अनुकूल परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती.

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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