आसनसोल/दुर्गापुर.
साइबर अपराधियों के धैर्य से भरे कारनामे से पुलिस भी हैरान है. करीब छह माह तक एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट करके लूटते रहने की घटना की शिकायत मिलते ही, एडीपीसी साइबर क्राइम थाना पुलिस नये सिरे से सोचने पर मजबूर हो गयी है कि उनके क्षेत्राधिकार में और कितने लोग हैं, जो डिजिटल अरेस्ट होकर घर पर बैठे हैं. इस घटना से जुड़ी शिकायत बुधवार रात साइबर क्राइम थाना में दर्ज हुई और पुलिस इसकी जांच में जुट गयी है.क्या है पूरा मामला, कैसे छह माह तक रहे डिजिटल अरेस्ट ?
दुर्गापुर विधाननगर इलाके के निवासी व हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन (दुर्गापुर यूनिट) के पूर्व कर्मचारी सुनिर्मलचंद्र चौधरी (80) ने अपनी शिकायत में बताया कि 30 सितंबर 2025 को दोपहर डेढ़ बजे एक फोन आया. कॉल करनेवाली एक महिला थी, उसने अपना परिचय टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की कर्मचारी अंकिता शर्मा के रूप में देते हुए बताया कि उनके नाम के केवाइसी विवरण का उपयोग करके आइसीआइसीआइ बैंक में एक खाता खोला गया है और इस खाता पर बाराखंबा रोड पुलिस थाना दिल्ली में 68 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग (संदीप कुमार मामला) का केस दर्ज हुआ है. महिला ने फोन कॉल एक दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया. उस व्यक्ति ने अपना परिचय सीबीआइ अधिकारी राहुल के रूप के दिया और आरोप लगाया कि 68 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का 10 फीसदी कमीशन उन्हें मिला है. इसकी जांच की जा रही है और गिरफ्तारी की धमकी दी.
राहुल के कहने पर डर से उन्होंने अपनी और पत्नी की सारी संपत्ति का विवरण उसे दे दिया. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरबीआइ के सुरक्षित खाते में अपना सारा पैसा जमा करने का निर्देश दिया. इसे लेकर आरबीआइ का कागजता भी दिखाया. 30 सितंबर से चार जनवरी 2026 तक साइबर अपराधियों ने उन्हें व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिये जोड़े रखा और इस दौरान उन्होंने उनलोगों के कहे अनुसार अपना और पत्नी का सारा जमा पैसा 2,68,40,182 रुपये उनके बताए खाते में ट्रांसफर किया. उनका दाबाव बना रहा, लेकिन अब उनके पास देने को कुछ नहीं था. अपना सारा कुछ गंवा देने के बाद 23 मार्च को उन्होंने इस विषय में अपने साले से बात करते ही पूरी स्थिति साफ हो गयी कि साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट करके पैसे लूटे. एनसीआरपी में शिकायत की और बुधवार रात को साइबर क्राइम थाना आसनसोल के आकर शिकायत दी. जिसके आधार पर केस नम्बर-23/26 में बीएनएस की धारा 316(2)/318(4)/319(2)/336(3)/338/340(2)/61(2) के तहत मामला दर्ज हुआ.“डिजिटल अरेस्ट बोलकर कुछ भी नहीं होता है. यह साइबर अपराधियों का फैलाया हुआ जाल है. टीवी में, रेडियो पर, मोबाइल फोन पर, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार इसे लेकर जागरूकता फैलाया जा रहा है. पुलिस भी अपने स्तर से लोगों को जागरूक करने के लिए नियमित कार्यक्रम कर रही है. इसके बाद भी लोग डिजिटल अरेस्ट के झांसे में फंसकर अपना सारा कुछ गंवा रहे हैं. यह चिंता का विषय है. यह पहला मामला सामने आया, जहां अपराधियो ने करीब छह माह तक डिजिटल अरेस्ट करके पैसे लूटा. पुलिस अपने स्तर से हर संभव प्रयास कर रही है. दर्जनों अंतरराज्यीय साइबर ठगों को पुलिस ने पकड़ा है, करोड़ों रुपये बरामद कर पीड़ितों को लौटाया भी गया है. जागरूकता से ही इसका अंत हो सकता है. ”