निजीकरण के खिलाफ वामपंथ का हुंकार, 10 अगस्त को 'जेल भरो' आंदोलन का एलान

केंद्र सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में CPI(M) ने 10 अगस्त को 'जेल भरो' आंदोलन का आह्वान किया है. पार्टी सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध कर रही है और रोजगार की सुरक्षा की मांग कर रही है. आम जनता से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है.

पानागढ़ से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

केंद्र सरकार की निजीकरण नीति के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सीपीआई(एम) ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. पार्टी ने 10 अगस्त को राज्यभर के जिला मुख्यालयों पर 'जेल भरो' आंदोलन और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.इसे लेकर पार्टी ने व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है तथा कार्यकर्ताओं और आम लोगों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की है.

निजीकरण का विरोध

सीपीआई(एम) द्वारा प्रचार में आरोप लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार देश के महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों और रणनीतिक संस्थानों का निजीकरण कर उन्हें बड़े देशी-विदेशी कॉरपोरेट घरानों के हवाले करना चाहती है. रेलवे, बंदरगाह, कोयला खदान, इस्पात उद्योग, सड़क एवं हवाई परिवहन, हवाई अड्डे, बैंक, बीमा, दूरसंचार, डाक, परमाणु ऊर्जा, बिजली उत्पादन एवं वितरण तथा रक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए इनके निजीकरण का विरोध किया गया है.

निजीकरण से खत्म होंगे रोजगार के अवसर

पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण से रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे, आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सरकारी संस्थानों की सामाजिक जवाबदेही कमजोर होगी.इन्हीं मुद्दों को लेकर 10 अगस्त को जिला मुख्यालयों के समक्ष प्रदर्शन कर गिरफ्तारी देने की रणनीति बनाई गई है. इस संबंध में पानागढ़ के सीपीएम नेता पूर्व पंचायत सदस्य हरजीत सिंह निक्की ने कहा कि, "देश की सार्वजनिक संपत्तियां जनता की पूंजी हैं. इन्हें निजी कॉरपोरेट कंपनियों के हाथों में सौंपने की किसी भी कोशिश का सीपीआई(एम) लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध करेगी.

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10 अगस्त को 'जेल भरो' आंदोलन

10 अगस्त का 'जेल भरो' आंदोलन जनता के अधिकारों, रोजगार की सुरक्षा और सार्वजनिक संस्थानों को बचाने की लड़ाई का हिस्सा है.हम आम लोगों से अपील करते हैं कि वे इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करें." पार्टी नेतृत्व का दावा है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के सार्वजनिक उपक्रमों और आम जनता के हितों की रक्षा के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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