जामुड़िया : श्रमिकों के दमन के खिलाफ सीटू का हल्लाबोल

देश के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का आक्रोश फूट पड़ा है. भाजपा शासित राज्यों में मजदूरों के कथित दमन व पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में 16 अप्रैल को सीटू के आह्वान पर देशव्यापी एकजुटता कार्यक्रम आयोजित हुआ.

जामुड़िया.

देश के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों का आक्रोश फूट पड़ा है. भाजपा शासित राज्यों में मजदूरों के कथित दमन व पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में 16 अप्रैल को सीटू के आह्वान पर देशव्यापी एकजुटता कार्यक्रम आयोजित हुआ. नोएडा में भड़की विरोध की चिनगारी अब दिल्ली एनसीआर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में फैल चुकी है. 16 अप्रैल को इस देशव्यापी आंदोलन का असर कोयला क्षेत्रों में भी देखने को मिला. भारत की कोलियरी मजदूर सभा सीटू ने तमाम इसीएल क्षेत्रों में प्रदर्शन किया. इसी कड़ी में कुनुस्तोड़िया क्षेत्र के नॉर्थ सियारसोल ओसीपी में विरोध प्रदर्शन किया गया. मौके पर केंद्रीय कमेटी के नेता कलीमुद्दीन अंसारी, सुब्रत सिद्धांत और उज्जवल मुखर्जी ने मजदूरों को संबोधित किया. प्रदर्शन में चंदन रविदास, मोकर्रम अंसारी, राधेश्याम सहित बड़ी संख्या में कोयला मजदूर उपस्थित रहे.

सीटू नेताओं ने कहा कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान नोएडा के सीटू नेताओं सहित कई मज़दूरों को जेल में डाल दिया गया है.सीटू का आरोप है कि पुलिस हिरासत में महिलाओं को भी ज़बरदस्त टॉर्चर का शिकार होना पड़ रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार को सीटू के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने जेल में बंद मज़दूरों की तत्काल रिहाई और भाजपा सरकार की ””दमनकारी नीतियों”” को बंद करने की मांग की.

इस प्रतिनिधिमंडल में संगठन के महासचिव एलामराम करीम, अखिल भारतीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे.नोएडा में 9 अप्रैल से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन 15 औद्योगिक क्षेत्रों के 6-8 बड़े क्लस्टर्स तक फैल गया है.अकेले नोएडा में 40 से 50 हज़ार मज़दूर सड़कों पर उतरे.मज़दूरों की मांग है कि न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह किया जाए.आरोप है कि मज़दूरों से 10-11 हज़ार रुपये में 12-13 घंटे काम कराया जा रहा है, जिसमें न ओवरटाइम मिलता है और न ही कोई सामाजिक सुरक्षा.

सीटू नेताओं ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर भाजपा नेता पश्चिम बंगाल चुनाव में ””भय नहीं, भरोसा”” का नारा दे रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा शासित राज्यों में मजदूरों के आंदोलन को पुलिस के जोर पर कुचला जा रहा है. अखिल भारतीय कृषक सभा ने भी मज़दूरों के इस संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन दिया है.सीटू नेता ने कहा कि यह केवल मज़दूरी की लड़ाई नहीं, बल्कि सीधा वर्ग संघर्ष है. जब तक लेबर कोड रद्द नहीं होते और मज़दूरों को उनका हक नहीं मिलता, यह आंदोलन जारी रहेगा.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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