बीरभूम से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट
बीरभूम जिले के नानूर प्रखंड में लगभग तीन बीघा भूमि को लेकर नया विवाद सामने आया है. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उक्त भूमि पर आज सुबह पहुंचकर इसे देवोत्तर (मंदिर) संपत्ति बताते हुए अपना दावा जताया. संगठन के कार्यकर्ताओं ने भूमि पर भगवा ध्वज फहराया, धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की तथा भविष्य में यहां लक्ष्मी माता ठाकुरानी के मंदिर निर्माण की घोषणा की.
अभिलेख में जमीन लक्ष्मीमाता के नाम
विश्व हिंदू परिषद के दक्षिण बीरभूम संगठनात्मक जिला सचिव पलाश हाजरा का दावा है कि नानूर ब्लॉक के चिटग्राम बस स्टैंड संलग्न बालियारा मौजा के आरएस दाग नंबर 872 की लगभग 1 एकड़ 21 शतक (करीब तीन बीघा) भूमि राजस्व अभिलेखों में लक्ष्मी माता ठाकुरानी की देवोत्तर संपत्ति के रूप में दर्ज है. उनका आरोप है कि इस भूमि पर लंबे समय से एक व्यक्ति ने अवैध कब्जा कर रखा था, जिसे हटाकर भूमि को पुनः देवोत्तर संपत्ति के रूप में चिह्नित किया गया.
भूमि पर की पूजा-अर्चना
भूमि पर पहुंचे विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और भगवा ध्वज स्थापित किया. संगठन के नेताओं ने कहा कि यह केवल भूमि पर दावा करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देवोत्तर संपत्ति की रक्षा और धार्मिक स्थलों के संरक्षण का अभियान है.
कानूनी दस्तावेज लाने की दी चेतावनी
दक्षिण बीरभूम संगठनात्मक जिला के सचिव पलाश हाजरा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस भूमि पर वैध स्वामित्व का दावा करता है तो वह संबंधित कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करे. दस्तावेजों की जांच के बाद यदि दावा सही पाया जाता है तो संगठन कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा.अन्यथा, इसी स्थान पर लक्ष्मी माता ठाकुरानी का मंदिर बनाकर प्रतिमा स्थापित की जाएगी.
कई पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे. इनमें संगठन के जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारी, स्थानीय कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में समर्थक शामिल थे.पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक अनुष्ठान और संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की गईं.
प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान नहीं
इस मामले में प्रशासन या संबंधित सरकारी विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. भूमि के स्वामित्व और कब्जे को लेकर प्रस्तुत दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. यदि इस संबंध में कोई विवाद या शिकायत दर्ज होती है तो अंतिम निर्णय राजस्व अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा.
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज
घटना के बाद इलाके में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है. भूमि के स्वामित्व, देवोत्तर संपत्ति की स्थिति और मंदिर निर्माण की घोषणा को लेकर लोगों के बीच विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं.
Also Read: पश्चिम बंगाल बनेगा देश का ‘सीड हब’, खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र
