आसनसोल. आसनसोल बार एसोसिएशन का पेन डाउन आंदोलन मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा. मंगलवार को इस मुद्दे पर जिला जज देव प्रसाद नाथ की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के डीसी सेंट्रल ध्रुव दास तथा बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि शामिल हुये. बैठक में अधिवक्ताओं ने अपनी विभिन्न शिकायतें और मांगें विस्तार से रखीं.
कोई सकारात्मक पहल नहीं
बार एसोसिएशन के सचिव बाणी कुमार मंडल ने बताया कि बैठक में उनकी मांगों के अनुरूप कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि जब तक अधिवक्ताओं की मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन और पेन डाउन जारी रहेगा. हालांकि अधिवक्ताओं के पेन डाउन के कारण कोर्ट का कामकाज प्रभावित हुआ लेकिन कोर्ट को सामान्य रूप से चलने के लिए ऑनलाइन प्रोडक्शन तथा सुनवाई की व्यवस्था की गई थी.
पुलिस ने नहीं की गंभीरता से कार्रवाई
गौरतलब है कि यह विवाद गत शुक्रवार को आसनसोल अदालत परिसर में अधिवक्ता नरेन साव के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद शुरू हुआ. नरेन साव ने घटना की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी. दूसरी ओर, आरोपित पक्ष ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. अधिवक्ताओं का आरोप है कि नरेन साव की शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर न केवल नरेन साव बल्कि ऐसे लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया, जो कथित तौर पर घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं थे। नरेन साव का दावा है कि उनके बीमार पिता के खिलाफ भी पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इसी के विरोध में आसनसोल बार एसोसिएशन ने पहले दिन पेन डाउन आंदोलन शुरू किया था. अधिवक्ताओं का कहना है कि पुलिस की इस कार्रवाई से वकीलों में भारी नाराजगी है और निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अयान मुखर्जी ने कहा कि यदि पुलिस अधिवक्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार कर रही है, तो आम लोगों के साथ क्या होगा, यह गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की.
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निष्पक्ष जांच की मांग
आसनसोल बार एसोसिएशन सचिव बाणी कुमार मंडल का कहना है कि उनका आंदोलन केवल अधिवक्ताओं के हितों के लिए नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी है. अधिवक्ताओं की मांग है कि दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा बिना ठोस आधार के किसी भी वकील को झूठे मामलों में फंसाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए. जब तक इस दिशा में ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
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