गर्मी से बचने के लिए जंगलमहल के आदिवासी पेड़ के नीचे ले रहे आश्रय

पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के जंगल महल के कटहल डांगा के आदिवासी भीषण गर्मी को देखते हुए अपने इलाके के एक कटहल के पेड़ के नीचे आश्रय ले रहे है. पेड़ के नीचे बांस का मचान बनाकर समूचा दिन पेड़ के नीचे ही लोग वहां बिता रहे है. शाम होने के बाद ही अपने घर में वे जा रहे हैं. दोपहर का खाना पीना सब इस पेड़ के नीचे ही हो रहा है.

पानागढ़

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पश्चिम बर्दवान जिले के कांकसा ब्लॉक के जंगल महल के कटहल डांगा के आदिवासी भीषण गर्मी को देखते हुए अपने इलाके के एक कटहल के पेड़ के नीचे आश्रय ले रहे है. पेड़ के नीचे बांस का मचान बनाकर समूचा दिन पेड़ के नीचे ही लोग वहां बिता रहे है. शाम होने के बाद ही अपने घर में वे जा रहे हैं. दोपहर का खाना पीना सब इस पेड़ के नीचे ही हो रहा है.

बच्चे भी अपने माता पिता के साथ इस मचान पर ही दिन बिता रहे है. 40 से 45 डिग्री तापमान के होने के कारण इलाके के लोगों का यही कटहल का पेड़ सहारा बना हुआ है. गांव के ज्यादातर घर टीन और एस्बेस्टस की छत वाले हैं. इस भीषण गर्मी में इन मकानों में रह पाना मुश्किल हो गया है. इसलिए सुबह ही महिलाएं अपने परिवार के बच्चों के साथ इस कटहल पेड़ के नीचे पहुंच कर सारा दिन बिताती हैं. यही पर सुस्ताना और खाना पीना होता है.

ग्रामीण लखी किस्कू का कहना है कि इस भीषण गर्मी में हम गरीबों का एक ही आश्रय है वह यह कटहल का पेड़ है. सुबह से शाम तक घर में रहना काफी मुश्किल हो जाता है. सूरज का तेज ताप और गर्मी बेचैन कर दे रही है. यही कारण है कि हम लोग अपने परिवार के साथ इस पेड के नीचे आकर सारा दिन बिताते है. खाना पीना बिल्कुल सादा रहता है.

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By AMIT KUMAR

AMIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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