डीएफओ प्रदीप बाउरी ने कहा- पंचायत स्तर पर किया जायेगा इसका गठन
नितुड़िया : इंटीग्रेटेड वाटर शेड मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (आइडब्ल्यूएमपी) कमिटी गठन का मामला स्थानीय विधायक पूर्णचन्द्र बाउरी और नितुरिया पंचायत समिति के अध्यक्ष शांतिभूषण प्रसाद यादव के बीच बने गतिरोध के कारण खटाई में पड़ गया है. कार्यों के निष्पादन में हो रही परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं.
सनद रहे कि विगत विधानसभा चुनाव से ही दोनों दिग्गजों के बीच गतिरोध कायम है और तृणमूल दो खेमों में बंट गयी है. सरबडी, दीघा, जनार्दनडीह आदि ग्राम पंचायतों के लिए इस प्रोजेक्ट के तहत चार माइक्र ो लेवल कमिटियां गठित होनी थी. जिसमें 10-10 सदस्य शामिल होंगे. कमिटी के सदस्यों में 60 फीसदी एससी/एसटी तथा 40 फीसदी सेल्फ हेल्प ग्रुप के सदस्य और इलाके के किसान होंगे. कमेटियों के कोषाध्यक्ष को 2500 रु पये मासिक भत्ता मिलेगा. लेकिन सरकारी नियम के अनुसार कोषाध्यक्ष वहीं ग्रामीण होगा, जिसके पास जमीन नहीं होगी.
इस कमेटी का काम मिट्टी और जल संरक्षण करना, बृक्षारोपण और उसका रख-रखाव आदि करना है. इसके तहत कुछ लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा. समिति गठन के लिए छह महीने पहले नितुरिया पंचायत समिति के अध्यक्ष श्री यादव ने वन विभाग को माइक्र ो लेवल समिति के सदस्यों की सूची सौंपी थी. इसी दौरान विधायक श्री बाउरी ने भी अपने स्तर से अलग सूची वन विभाग को सौंप दी. इसके बाद मामला विवादास्पद हो गया.
वन विभाग के स्तर से सभा का आयोजन किया गया. इसमें विधायक के प्रतिनिधि, नितुरिया पंचायत समिति के अध्यक्ष श्री यादव, संबंधित पंचायतों के प्रधान, कंसावती नॉर्थ के डीएफओ प्रदीप बाउरी शामिल थे. बैठक के दौरान भी दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया तथा पंचायत समिति अध्यक्ष श्री यादव वहां से निकल गये. कमेटी गठन का काम अधर में लटक गया. डीएफओ श्री बाउरी ने बताया कि अब पंचायत स्तर पर बैठक कर कमेटी का गठन किया जायेगा. इस मामले में विधायक के प्रतिनिधियों का कहना है कि नितुरिया पंचायत समिति अध्यक्ष द्वारा सौंपी गयी सूची में सरकारी नियमों का पालन नहीं किया गया है. जबकि अध्यक्ष श्री यादव का कहना है कि इसमें उनकी कोई भूमिका ही नहीं है.
