स्कूल बंक की फितरत पर पानी फेरेगी तकनीक

निगरानी. रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन टैग्स से अभिभावकों को मिलेगी बच्चों के स्कूल में प्रवेश व निकासी की सूचना पूर्व बर्दवान, बांकुड़ा, नदिया िजले में शुरू की गयी है इसकी प्रक्रिया स्कूल का नाम लेकर गायब होनेवाले बच्चों की निगरानी के लिए विशेष पहल आसनसोल : निजी स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों की गतिविधियों, उनकी उपस्थिति पर […]

निगरानी. रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन टैग्स से अभिभावकों को मिलेगी बच्चों के स्कूल में प्रवेश व निकासी की सूचना
पूर्व बर्दवान, बांकुड़ा, नदिया िजले में शुरू की गयी है इसकी प्रक्रिया
स्कूल का नाम लेकर गायब होनेवाले बच्चों की निगरानी के लिए विशेष पहल
आसनसोल : निजी स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों की गतिविधियों, उनकी उपस्थिति पर निगरानी रखने व पैरेंट्स को सतर्क करने के लिए पहले से ही स्कूल प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गयी है. इसको अपडेट करते हुए हाल ही में एक नयी तकनीक विकसित की गयी है. इसके जरिये घर बैठे पैरेंट्स को लगातार अपने बच्चे की गतिविधियों के बारे में सूचना मिलती रहेगी.
जो बच्चे स्कूल का नाम लेकर कहीं आैर गायब हो जाते हैं या स्कूल से नदारद रहते हैं, उन पर निगरानी रखने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन टैग्स तकनीक शुरू की गयी है. इसके जरिये एक उपकरण स्कूल के गेट पर लगा रहेगा. इस गेट पर बच्चे के प्रवेश करने व निकलने के साथ ही पैरेंट्स को इसकी सूचना मोबाइल एप के जरिये पहुंच जायेगी. यह सुविधा फिलहाल बंगाल में तीन जिलों व दो ग्रामीण इलाकों में शुरू की गयी है.
इस तकनीक के जरिये जैसे ही गेट पर रीडर डिवाइस के पास बच्चा पहुंचेगा, उसकी उपस्थिति दर्ज हो जायेगी. साथ ही अभिभावक के पास बच्चे के प्रवेश करने का एक अलर्ट संदेश भी चला जायेगा. नदिया व बांकुड़ा के दो स्कूलों में व बर्दवान टाउन के एक स्कूल में फिलहाल यह सुविधा शुरू की गयी है. इस सुविधा के क्रियान्वयन के लिए छात्रों के गले में कार्ड लटके रहेंगे. बच्चों की पूरी जानकारी पैरेंट्स के फोन से लिंक की जायेगी. जिस कंपनी ने इस टेक्नोलॉजी को स्थापित किया है, उसने सेलफोन एप्स के साथ भी इसको जोड़ने की व्यवस्था की है.
इस एप से छात्रों के होमवर्क की जानकारी व स्कूल से दी गयी सूचना का भी विवरण रहेगा. जिस कंपनी ने यह तकनीक स्थापित की है, उसने फोन पर आधारित एप से इसको मिला कर रखा है. इसके जरिये अभिभावकों को बच्चों के होमवर्क की जानकारी मिलती रहेगी. हालांकि स्कूल के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है, जिससे स्कूल में नागा करनेवाले बच्चों की संख्या निकाली जा सके. स्कूल प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक की मदद से काफी फायदे होंगे. इस प्रणाली से बच्चों की उपस्थिति का डाटा तैयार किया जा सकता है. बच्चों के लिए अब पैरेंट्स को कॉल नहीं करना पड़ेगा, बल्कि ऑटोमेटिकली सूचना उनके पास चली जायेगी. इससे उनका समय बचेगा.
इस विषय में नदिया के कृष्णागंज स्थित सेंट पीटर्स इंगलिश स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि यह एक फूलप्रूफ प्रणाली है, इससे बच्चे स्कूल से नदारद नहीं हो पायेंगे. यह स्कूल बांग्लादेश बॉर्डर से पांच किलोमीटर दूर है. बांकुड़ा जिले के दुर्लभपुर आनंदमार्ग स्कूल के आचार्य सत्यानिष्ठानंद का कहना है कि इस प्रणाली से अभिभावक यह जान पायेंगे कि छात्र कब स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं व निकल रहे हैं. नदिया के स्कूल में आठवीं तक के छात्रों का नामांकन किया गया है. जून, 2016 में यह विशेष उपस्थिति प्रणाली शुरू की गयी है.
होमर्वक व अधिसूचना के लिए यह प्रणाली काफी मददगार है. इस प्रणाली से अभिभावक काफी खुश हैं. कुछ शिक्षकों का कहना है कि बच्चे के न आने पर अभिभावक उनका होमर्वक भी नहीं जान पाते थे, अब फोन पर ही उनको होमवर्क से जुड़ी जानकारी भी मिल जायेगी. अभिभावक इस प्रणाली से काफी खुश हैं. र्बदवान आनंदमार्ग स्कूल के प्रिंसिपल आचार्य कृतात्मानंद अवधूत ने कहा कि इस उपकरण के जरिये एक ही समय पर 75 छात्रों को पढ़ा जा सकता है. कृष्णनगर की कंपनी प्रगति के एक क्रिएटिव डिजाइनर ने बताया कि राज्य में अपने तरह की यह पहली प्रणाली है. कुछ अभिभावकों का कहना है कि इससे हम लोगों का तनाव कम हुआ है. इस तकनीक से बच्चों की उपस्थित, होमर्वक व स्कूल द्वारा जारी सूचनाओं से लगातार हमको अपडेट रखा जा रहा है.
भारतीय विद्या भवन स्कूल में अगर बच्चा गैरमाैजूद रहता है, तो पैरेंट्स के रजिस्टर्ड मोबाइल पर तुरंत एसएमएस चला जाता है. कई बार बच्चा स्कूल का नाम लेकर कहीं आैर घूमता रहता है, हम पैरेंट्स को आगाह करते हैं. इसके अलावा अन्य सभी आवश्यक सूचनाएं पैरेंट्स को मोबाइल पर दी जाती हैं. लंबी सूचना स्कूल की वेबसाइट पर दी जाती है, जिसका अलर्ट मैसेज भी समय-समय पर पैरेंट्स को भेजा जाता है. स्कूल में ऐसा सोफ्टवेयर है, जिससे कंप्यूटर के जरिये हजारों बच्चों के पैरेंट्स को अपडेट किया जाता है.
डॉ रेखा वैश्य, प्रिंसिपल, भारतीय विद्या भवन
बिरला हाइस्कूल अपने बच्चों की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखता है. ऐसा नहीं है कि स्कूल का नाम लेकर बच्चा कहीं आैर चला जाये, फिर भी सुरक्षा व अनुशासन के नजरिये से सभी सूचनाएं समय-समय पर अभिभावकों को दी जाती है. प्रत्येक बच्चे के पैरेंट्स की मेल आइडी व मोबाइल नंबर स्कूल के रिकार्ड में माैजूद है. कई बार अचानक भी स्कूल की छुट्टी घोषित करनी पड़ती है या परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी ऑनलाइन पैरेंट्स को दी जाती है. स्कूल के कंप्यूटर में ऐसा सॉफ्टवेयर जोड़ा गया है, जिससे एक ही समय पर सभी सूचनाएं बच्चों के पैरेंट्स के पास मेल आइडी पर या रजिस्टर्ड नंबर पर चली जाती हैं.
मुक्ता नैन, प्रिंसिपल, बिरला हाइस्कूल, कोलकाता

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