हताशा. साढ़े तीन लाख कोयला श्रमिकों के वेतन समझौते के मुद्दे पर बना रहा गतिरोध
कोयला श्रमिकों के वेतन समझौते पर सहमति नहीं बनने के आसार है. पूर्ण जेबीसीसीआइ की बैठक से एक दिन पहले हुयी सब कमेटी की बैठक में प्रबंधन के स्तर से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आने से जेबीसीसीआइ की बैठक में हंगामा तय है. यूनियन प्रतिनिधियों के कड़ा रूख अपनाने की संभावना है.
आसनसोल : साढ़े तीन लाख से अधिक कोयला श्रमिकों के दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के लिए गठित जेबीसीसीआइ-10 की सब कमेटी की बैठक रविवार को बेनतीजा रही. यूनियन प्रतिनिधियों के दबाब के बाद सब कमेटी को भंग कर दिया गया. वेतन समझौते के मुद्दे पर पूर्ण जेबीसीसीआइ-10 की दो दिवसीय बैठक सोमवार से नयी दिल्ली में शुरू होगी. सब कमेटी के परिणाम को देखते हुए इस बैठक में भी किसी परिणाम की संभावना नहीं दिख रही है.
इधर यूनियन प्रतिनिधियों ने आंदोलन में जाने के संकेत देने शुरू किये हैं.
सनद रहे कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता शीघ्र करने के लिए जेबीसीसीआइ की सब कमेटी गठित की गयी थी. लेकिन पिछली सभी बैठकों में प्रबंधन के स्तर से साफ नजरिया नहीं अपनाये जाने से इसकी बैठके विफल साबित हो रही थी. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सब कमेटी की बैठक रविवार को नयी दिल्ली में हुयी.
यूनियन प्रतिनिधि श्री पांडेय ने कहा कि बैठक पिछली बैठकों की ही तरह विफल रही. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने कोई तैयारी नहीं की थी. बैठक शुरू होने के बाद उन्होंने वेतन समझौते के मुद्दे पर प्रस्ताव रखने के बजाय अन्य मुद्दों पर बात करने लगे. यूनियन प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि पिछली कई बैठकों में प्रबंधन का रवैया स्पष्ट नहीं है. प्रबंधन प्रतिनिधियों को यह बात रखनी होगी कि वेतन समजाैते के बारे में उनके पास क्या प्रस्ताव हैं? इसके बाद प्रबंधन प्रतिनिधियों ने कहा कि अभी तक प्रबंधन के स्तर से इस मुद्दे पर स्पष्ट कोई निर्णय नहीं लिया गया है. जो रिपोर्ट बननेवाली थी, वह भी पूरी नहीं हो पायी है. इस कारण इस बैठक में कोई प्रस्ताव रख पाना मुश्किल है. उन्होंने अगली बैठक में प्रस्ताव रखने का आश्वासन दिया.
इसके बाद यूनियन प्रतिनिधि पूरी तरह से विफर पड़े. उनका कहना था कि वेतन समझौता शीघ्र करने के लिए जेबीसीसीआइ की सब कमेटी गठित की गयी थी. लेकिन प्रबंधन साजिश के तहत लगातार इसमें विलंब कर रहा है. इस स्थिति में सब कमेटी का कोई औचित्य नहीं है. इस बैठक के साथ ही सबकमेटी का अस्तित्व भी समाप्त कर दिया जाये. प्रबंधन प्रतिनिधियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन सभी यूनियन प्रतिनिधियों ने एक मत से सब कमेटी को भंग करने का प्रस्ताव दिया. इसके बाद बैठक समाप्त कर दी गयी. इसके पहले सब कमेटी को स्थायी रूप से भंग कर दिया गया. अब वेतन समझौते का निर्णय पूर्ण जेबीसीसीआइ की बैठक में ही होगा.
श्री पांडेय ने कहा कि इस स्थिति में सोमवार से शुरू हो रहे दोदिवसीय बैठक को लेकर भी कोई अधिक संभावना नहीं दिख रही है. इसके बाद भी पूर्ण बैठक में यूनियन प्रतिनिधि शामिल होंगे तथा अपनी बात प्रमुखता से रखेंगे. उन्होंने कहा कि यदि जेबीसीसीआइ की बैठक में बात नहीं बनी तो केंद्रीय यूनियनें संयुक्त बैठक कर रणनीति तय करेंगे तथा आंदोलन की घोषणा करेंगे. उन्होंने कहा कि उनके केंद्रीय यूनियन से जुड़े कोयला फेडरेशन की बैठक में भी दो मुद्दों पर आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है. इन मुद्दों में दसवां कोयला वेतन समझौता शीघ्र करना शामिल है. लेकिन इसके साथ ही सीएमपीएफ के इपीएफओ में विलय का विरोध किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह कोयला श्रमिकों के भविष्य का सवाल है तथा इस मुद्दे पर किसी भी तरह से समझौता नहीं किया जायेगा. इस विलय से सर्वाधिक घाटा कोयला श्रमिकों को होगा तथा उनकी पेंशन राशि कम हो जायेगी. इस मुद्दे पर अपने स्तर से तथा संयुक्त रूप से आंदोलन किया जायेगा.
बैठक में ये थे उपस्थित
बैठक में कमेटी के अध्यक्ष सह सीसीएल व बीसीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह, इसीएल व डब्ल्यूसीएल के सीएमडी आरआर मिश्र, सीआइएल के वित्त निदेशक चंदन कुमार डे, एनसीएल के सीएमडी तापस कुमार नाग, एससीसीएल के निदेशक( कार्मिक, प्रशासन व कल्याण) जे पवित्रण कुमार तथा यूनियन प्रतिनिधियों में नत्थूलाल पांडेय (एचएमएस), रमेन्द्र कुमार (एटक), डीडी रामानंदन (सीटू) तथा डॉ बीके पांडेय (बीएमएस) शामिल थे.
