आसनसोल : आसनसोल नगर निगम का क्रीड़ा एवं संस्कृति विभाग आगामी नौ मई से 11 मई तक विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर स्थानीय रवींद्र भवन में त्रिदिवसीय समारोह आयोजित करेगा. इसकी तैयारी के मुद्दे पर मेयर जितेन्द्र तिवारी की मौजूदगी में नगर निगम मुख्यालय के एक्सक्यूटिव हॉल में मेयर परिषद सदस्य (क्रीड़ा एवं संस्कृति) अभिजीत घटक की अध्यक्षता में मंगलवार को बैठक हुयी.
अवसर पर कार्यालय अधीक्षक तरूण बनर्जी, निगम के कानूनी सलाहकार रवि उल इस्लाम, पार्षद सीके रेश्मा रामाकृष्णन, पार्षद श्रवणी मंडल, पार्षद बबीता दास, पार्षद कल्याण दासगुप्ता, पार्षद विनोद यादव सहित आसनसोल संलगA विभिन्न स्कूलों के शिक्षक आदि उपस्थित थे. बैठक में उपस्थित पार्षदों तथा स्कूल प्रतिनिधियों से आयोजन को लेकर सुझाव मांगे गये
सुबह शहर में प्रभात फेरी निकालने पर सहमति बनी. शहर को लाइट से सजाने, शहर के विभिन्न इलाकों में स्थापित कवि गुरू की प्रतिमाओं को सजाने, शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर उनके पोस्टर व बैनर लगाने पर सहमति बनी. पूरे नगर निगम इलाके में तीनों दिन उत्सवी माहौल रहेगा. तीन दिवसीय कार्यक्रम में लोक कलाकार एवं सांस्कृतिक शिल्पी नृत्य, रविंद्र संगीत, नगरूल गीति, कवि गुरू के लिखे नाटकों का मंचन किया जायेगा.
मेयर परिषद सदस्य श्री घटक ने कहा कि कवि गुरू रवींद्र नाथ की लिखी रचनाओं ने पूरे देश ही नहीं विश्व में बंगाल को गौरवान्वित किया है. उनकी रचनाओं से प्रेरित होकर तत्कालिन ब्रिटिश शासक ने उन्हें नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया था. मई माह में नगर निगम इलाके में कोई क्लब, सामाजिक संगठन, सांस्कृतिक संगठन, गैर सरकारी संगठन, कुछ लोग समूह बनाकर अपने स्तर से रवींद्र जयंती को लेकर अपने इलाके में सांस्कृतिक कार्यक्रम नजरूल गीति, रविंद्र संगीत, नाटक आदि प्रस्तुत करना चाहें तो निगम स्तर से आयोजन में वित्तीय सहयोग दिया जायेगा.
उन्होंने कहा कि कवि गुरू बांग्ला संस्कृति के परिचायक हैं. उनके कार्यो एवं रचनाओं का बंगाल भर में प्रचार प्रसार होना चाहिए. मेयर श्री तिवारी ने कहा कि कवि गुरू ने बंगाल की संस्कृति को न सिर्फ समृद्ध किया बल्कि विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान की पहली कतार में ला खड़ा किया. उन्हें हटा कर बांग्ला संस्कृति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है.
स्वाभाविक तौर पर नगर निगम प्रशासन उनकी जयंती समारोह को धूमधाम से मनायेगा. उन्होंने कहा कि पश्चिमी संस्कृति के दुष्प्रभाव में फंस कर युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक पहचान खो रही है. इस दिशा में सार्थक पहल की जरूरत है.
