रानीगंज : सियारसोल राज परिवार की ऐतिहासिक दस दिवसीय रथ पूजा की तैयारी लगभग पूरी हो गयी है. पीतल के बने रथ को चमकाने के लिये इमली के पानी का उपयोग किया जा रहा है. परंपरानुसार शनिवार सुबह राज परिवार के वंशज बी माविक सर्वप्रथम रथ को खीचेंगे.
रथयात्रा में हजारों की संख्या में भक्त हिस्सा लेंगे. इस दौरान आयोजित 10 दिवसीय मेला के संचालन का दायित्व सियारसोल स्पोर्ट्स एवं कल्चरल एसोसियेशन को मिला है. सोसायटी के सचिव अनुराधा मालिया सर्राफ ने बताया कि वर्ष 1874 में महारानी हरसुंदरी देवी ने रथ पूजा की शुरुआत की थी. उस वक्त रथ लकड़ी का था.
वर्ष 1910 में यह जल गया. तत्कालीन राजा प्रमथ नाथ मालिया की पत्नी किशन देई ने पीतल का रथ बनवाया. उसी वक्त से इसकी पूजा की जाती है. रथ पर सवार राजपरिवार के कुल देवता नारायण दामोदर जी की पूजा की जाती है. इसमें श्रीमद्भागवत में उल्लेखित पात्रों का चित्र अंकित है. पहले रथ को खींचकर पुरानी राजबाड़ी से नयी राजबाड़ी लाया जाता था. वर्ष 2000 में पुरानी राजबाड़ी के ढह जाने पर नयी राजबाड़ी से पुरानी राजबाड़ी तक रथ को खींचकर लाया जाता है. नौ दिन बाद पुरानी राजबाड़ी से वापस खींचकर इसे नयी राजबाड़ी लाया जाता है.
सियारसोल स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसियेशन के सचिव सागर बनर्जी ने बताया कि मेले में करीब चार सौ स्टॉल लगाये जा रहे है. नागर दोला, टॉय ट्रेन, विभिन्न प्रकार के झूले, मैजिक शो लगाये जा रहे हैं. मेला के दौरान 100 स्वयंसेवकों के अलावा पुलिस कर्मी भी तैनात रहेंगे.
मनमाना शुल्क लेने का आरोप
सियारसोल रथ मेला में लगनेवाले स्टॉलों से लिये जाने वाले शुल्क का विरोध करते हुए मालिया हेरिटेज सोसाइटी की चेयरमैन सह मलिया परिवार की अनुराधा मालिया सर्राफ ने मेला संचालित करने वाले सियारसोल स्पोर्ट्स एंड कल्चरल एसोसियेशन के विरुद्ध स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करायी एवं इसकी प्रति आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नर को सौंपी है.
उनका आरोप है कि उनके वंशजों ने सदैव ही दुकानदारों को नि:शुल्क स्थान मुहैया कराया. लेकिन पिछले 15 वर्षो से सियारसोल स्पोर्ट्स एंड कलचरल एसोसियेशन दुकानदारों से मनमाने तरीके से शुल्क वसूल रहा है. एसोसियेशन के सचिव ने आरोप का खंडन करते हुये कहा कि स्टॉल मालिकों से सामान्य शुल्क लिया जाता है. इससे फायर ब्रिगेड, नगरपालिका आदि का शुल्क चुकता किया जाता है.
