स्मार्ट सिटी : शहरी विकास विभाग ने की इच्छुक कंपनियों के प्रतिनिधियों संग बैठक
आसनसोल : आसनसोल शहर में स्मार्ट सिटी विकसित करने में दिलचस्पी रखनेवाली डेवलपर्स कंपनियों ने शहर में प्रस्तावित 50 एक ड़जमीन पर पानी तथा बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है. उनका कहना है कि प्रस्तावित जमीन को अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रस्तावित भूखंड की चारदीवारी का निर्माण भी जरूरी है.
सनद रहे कि राज्य सरकार ने थीम पर आधारित छह शहरों – आसनसोल, देवग्राम, बोलपुर, कल्याणी, बारूईपुर तथा डुमरजोला शामिल है. इनमें से आसनसोल का चयन उद्योग विकास के लिए किया गया है.
इन छह प्रस्तावित शहरों के लिए राज्य सरकार ने 447 एक ड़जमीन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. आसनसोल में 50 एक ड़जमीन उपलब्ध होगी, जिस पर अग्निवीणा की थीम पर शहर का विकास किया जायेगा. शहर विकसित करनेवाली कंपनियों का चयन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जायेगा.
इस योजना को अग्रगति देते हुए राज्य सरकार के शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने दो दिन पहले इच्छुक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की.
इनमें दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई सहित देश की विभिन्न कंपनियों के साथ ब्रिटेन की कंपनियों के सौ से अधिक प्रतिनिधि शामिल थे. उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी माह के अंत तक ब्रिटेन का दौरा करेंगी तथा आसनसोल के प्रस्तावित अग्निवीणा शहर में निवेश करने के लिए ब्रिटानी कंपनियों को आमंत्रित करेंगी. इसके लिए आसनसोल में मौजूद संसाधनों व संभावनाओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसका प्रेजेंटेशन लंदन में निवेशकों के समक्ष किया जायेगा.
कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रस्तावित शहरों के स्थल पर राज्य सरकार के स्तर से पानी व बिजली की पर्याप्त आपूर्त्ति की व्यवस्था की जानी चाहिए. जैसे ही शहर निर्माण का कार्य शुरू होगा, प्रस्तावित स्थल पर रोजगार की संभावना देख अतिक्रमण शुरू हो जायेगा.
इसे रोकने के लिए अभी से ही प्रस्तावित स्थल पर चारदीवारी का निर्माण होना चाहिए. कुछ और भी गंभीर सुझाव रखे गये. शहरी विकास विभाग के अधिकारियों ने उन सुझावों को सूचीबद्ध किया. इन प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि आगामी दय दिन में वे कुछ और सुझाव दें, ताकि उनके आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो सके.
निवेशकों के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस प्रस्तावित शहर में निवेश करनेवाली कंपनियों को लाभ भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (आइआरआर) कम से कम 18 फीसदी या इससे अधिक होना चाहिए. इसके अभाव में कंपनियों के सामने आने की संभावना काफी कम है. सरकारी अधिकारियों ने कहा कि इन शहरों के लिए वित्तीय संभावना रिपोर्ट बनाने का दायित्व इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज इंडिया लिमिटेड (आइएलएफएसआइ) को सौंपा गया है.
शीघ्र ही इसकी रिपोर्ट आने की संभावना है. सनद रहे कि इन शहरों में बननेवाली आवासीय योजना में 25 फीसदी आवास आर्थिक रूप से विपन्न नागरिकों को रियायत दर पर उपलब्ध कराये जायेंगे.
