बिहार, यूपी मॉडल होगा फेल

आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र तिवारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदी का विकास बिहार या उत्तर प्रदेश के मॉडल पर नहीं हो सकता है. इसके लिए बंगाल के मॉडल को ही अख्तियार करना होगा. बिहार या यूपी मॉडल को लागू करनेवाले भले ही अपना लाभ कर लें, दूसरे का […]

आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र तिवारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदी का विकास बिहार या उत्तर प्रदेश के मॉडल पर नहीं हो सकता है. इसके लिए बंगाल के मॉडल को ही अख्तियार करना होगा. बिहार या यूपी मॉडल को लागू करनेवाले भले ही अपना लाभ कर लें, दूसरे का बुरा कर दें, लेकिन वे हिंदी का भला किसी भी हालत में नहीं कर सकते.
वे शनिवार को दयानंद विद्यालय (एचएस) के सभागार में घासीराम अग्रवाल की पुण्य तिथि पर आयोजित घासीराम अग्रवाल स्मृति सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे. इसकी अध्यक्षता ‘आस्था’ के अध्यक्ष मनोहर भाई पटेल व संचालन संस्था के संयोजक नवीनचंद सिंह ने किया.
श्री तिवारी ने कहा कि आसनसोल शहर के बाजार इलाके के निवासियों की मांग थी कि स्व. घासीराम के नाम पर सड़क का नामाकरण हो. इस कारण पद्मतालाब से जाैहरमल जालान इन्स्टीच्यूट भवन तक की सड़क का नाम घासीराम सरणी रखा गया है. इसके लिए इस इलाके की जनता बधाई की पात्र है. उन्होंने महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि ‘आस्था’ हिंदी शिक्षकों, साहित्यकारों व हिंदी प्रेमियों की संस्था है. इससे कई अतंर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकार भी जुड़े हैं. ये नियमित रूप से हिंदी भाषा और साहित्य के लिए सक्रिय रहते हैं.
लेकिन इनकी गतिविधियां शिक्षित तबके तक ही सीमित रहती है. जमीनी सच्चाई यह है कि इस इलाके में बड़ी संख्या में मेहनतक व अशिक्षित हिंदी भाषी है. उनके दु:ख- दर्द को कम करनेवाली गतिविधियां संचालित नहीं होती. उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि साहित्य को अमीर लोगों के मनोरंजन का माध्यम नहीं बनना चाहिए, बल्कि अशिक्षित का भी मानसिक विकास कर उसे मुख्य धारा में लाने का कार्य करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सिर्फ आलोचना के लिए किसी की आलोचना नहीं होनी चाहिए. आलोचना करते समय उसके गुणों की भी प्रशंसा होनी चाहिए. तभी आलोचना की सार्थकता है. यदि किसी को हटाना भी तो पहले उसका विकल्प ढ़ूंढ़ा जाना चाहिए. एक व्यवस्था का विकल्प दूसरी व्यवस्था ही हो सकती है.
उन्होंने कहा कि राज्य में हिंदी के विकास को लिए बिहार व यूपी का मॉडल नहीं चलेगा. आसनसोल के लिए यहां का मॉडल अपनाना होगा. अन्यथा हिंदी के पक्ष में जो माहौल बना है, वह अधिक दिनों तक नहीं रह पायेगा. उन्होंने कहा कि आसनसोल नगर निगम की पहल पर उषाग्राम में निर्माणाधीन हिंदी भवन का कार्य आगामी 31 जुलाई को पूरा हो जायेगा. उस दिन उसका लोकार्पण समारोह आयोजित किया जायेगा. उन्होंने कहा कि यह इस शिल्पांचल की बड़े दिनों की मांग थी. इस भवन का उपयोग हिंदी भाषा व संस्कृति के विकास के लिए होना चाहिए. हिंदी प्रेमियों की सलाह के अनुसार ही इसका संचालन होगा.
संचालन करते हुए संयोजक श्री सिंह ने कहा कि घासीराम ने धार्मिक पुस्तकों के पुस्तकालय की स्थापना की थी. आस्था की स्थापना भाषा व साहित्यिक गतिविधियों के संचालन के लिए की गयी थी. लेकिन उनके असामयिक निधन के बाद इसके भविष्य पर सवाल उठने लगे थे.
लेकिन उनके दो पुत्रों अशोक अग्रवाल व अरुण अग्रवाल ने इन्हें जारी रखने की घोषणा की. इस समय भी आस्था निरन्तर इन गतिविधियों में शामिल है. समारोह को विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ दामोदर मिश्र, पूर्व पार्षद उमा सर्राफ, पूर्व बोरो चेयरमैन प्रबाल बोस, साहित्यकार नर्मेदेश्वर लाल श्रीवास्तव आदि ने भी संबोधित किया. इसके पहले समारोह में शामिल लोगों ने स्व. घासीराम की तस्वीर पर माल्यार्पण किया.
आस्था के स्तर से साहित्य के क्षेत्र में अनवरत सृजन करनेवाले नर्मेदेश्वर लाल श्रीवास्तव तथा समाजसेवा में पूर्व पार्षद उमा सर्राफ को घासीराम अग्रवाल स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही जौहरमल जालान इन्स्टीच्यूट की कक्षा नौ के छात्र अक्षर गुप्ता, दयानंद विद्यालय की कक्षा छह के छात्र जीतेंद्र कुमार शर्मा व कक्षा सात के छात्र शिवा सिंह तथआ आर्य कन्या विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्र सिमरन गिरि व कक्षा आठ की छात्र निक्की कुमारी यादव को दो-दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गयी. इसके पहले आकांक्षा कुमारी ने पुण्यतिथि गीत पेश किया.

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