45 हजार आवासों की मरम्मत की है कंपनी की योजना
कई कॉलोनियों का होगा अप ग्रेडेशन, बढ़ेगी कर्मी सुविधा
सांकतोड़िया : बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंनसिएल रीकंस्ट्रक्शन (बीआइएफआर) बाहर निकलने के बाद इसीएल प्रबंधन ने अपने कर्मियों की सुविधाओं पर ध्यान देना शुरू किया है.
विभिन्न टाइप के 356 नये आवासों के निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. 45 हजार आवासों की मरम्मत की योजना है. कंपनी के सीएमडी के तकनीकी सचिव निलाद्री राय ने कहा कि पहले कंपनी के निदेशक बोर्ड को 20 करोड़ रुपये तक की लागत की परियोजना को मंजूरी देने का अधिकार था. इससे अधिक राशि होने पर कोल इंडिया से मंजूरी लेनी पड़ती थी.
इस समय कंपनी निदेशक बोर्ड 150 करोड़ रुपया तक की परियोजना को अपने स्तर से मंजूर कर सकता है. कंपनी को शीघ्र ही मिनी रत्न का दर्जा मिल जायेगा. इसके बाद पांच सौ करोड़ रुपये की लागत की परियोजना को मंजूरी दी जा सकेगी. कंपनी के पास कुल 91 हजार आवास है. जिसमें 62 हजार स्टैंडर्ड और 29 हजार नन स्टैंडर्ड आवास है.
झांझरा एरिया में ए टाइप के 192 आवास, सोनपुर बाजारी क्षेत्र में डी टाइप के आठ सी टाइप के 36 आवास, एसपी मांइस क्षेत्र में सी टाइप के चार एनएचएस 36, इसीएल मुख्यालय में डी टाइप आठ सी टाईप के 24 आवास तथा सालानपुर एरिया में डी टाइप आठ सी टाइप के 16 तथा बी टाइप के 24 नये आवास प्रथम फेज में बनाना है. कार्मिक निदेशक केएस पात्र का कहना है कि कंपनी के लिये अपने कर्मियों के हित व उनकी सुविधा ही प्राथमिकता है. उन्हें सुरक्षित व प्रदूषण मुक्त जगहों पर बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये युद्धस्तर पर निर्माण कार्य हो रहा है.
कई कॉलोनियों का अपग्रेडेशन किया जा रहा है ताकि उन्हे सभी आधुनिक एवं जरुरी जनसुविधाएं मुहैया करायी जा सके. मालूम हो कि अभी भी पूरे कोल इंडिया के सभी अनुषंगी कंपनियों की अपेक्षा इसीएल में मैन पावर अधिक है. जून के अंत में दो हजार से अधिक सेवानिवृत्त हो जायेंगे.
