इस बार हिलसा मछलियों के पकड़ने के परिमाण में अच्छी वृद्धि की संभावना
हल्दिया : करीब 61 दिनों तक राज्य के समुद्री इलाकों में मछली पकड़ने पर लगी रोक की मियाद समाप्त होने के साथ ही जैसे मछुआरों के बीच जैसे खुशी लहर छा गयी हो. मौजूदा समय में भले ही बारिश काफी कम हुई हो, लेकिन मौसम तो वर्षा का ही है.
ऐसे में बंगाल के बाजार में खासतौर से हिलसा (इलिस) मछलियों की मांग काफी तेज हो गयी है. अत: ज्यादातर मछुआरे अपनी जाल में हिलसा मछलियों के ही पकड़े जाने की कामना ज्यादा कर रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक समुद्री मछलियों के संरक्षण और मछलियों के उत्पादन होती रहे, इसलिए राज्य के मत्स्य विभाग की ओर से करीब 61 दिनों तक समुद्र में मछली पकड़ने पर पाबंदी लगायी गयी थी. विगत 14 जून को दिये निर्देश की अवधि समाप्त हो गयी. हालांकि मत्स्य विभाग की ओर से इस बात पर ध्यान रखा जा रहा है कि छोटी हिलसा मछलियों को शिकार से बचाया जा सके.
दीघा के समुद्री इलाके के मछुआरों का कहना है कि बारिश की शुरुआती दौर में बड़ी संख्या में हिलसा मछलियों को पकड़ने में सफलता मिली है. उन्होंने संभावना जतायी है कि विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष वर्षा मौसम की समाप्ति तक हिलसा मछलियों के पकड़ने की संख्या और बढ़ जायेगी.
मौजूदा समय में मछलियों के शिकार के लिए दीघा के समुद्री इलाकों में करीब 600-700 छोटी-बड़ी नौकाएं तैनात हैं. कुछ नौकाओं का वापस आना भी हो गया है और उन नौकाओं के मछुआरों ने बड़ी संख्या में हिलसा सहित चिंगड़ी, पम्प्रेट सहित अन्य समुद्री मछलियों का भी शिकार किया है. बाजारों में प्रति किलोग्राम हिलसा मछली की कीमत करीब एक हजार रुपये के आसपास है. दीघा स्थित मछलियों के बड़े बाजारों में ओड़िशा से भी मछलियों की खपत हो रही है. मछुआरों का कहना है मत्स्य विभाग के कड़े रुख की वजह से करीब 500 ग्राम वजन से ज्यादा हिलसा मछलियों का शिकार करना संभव हो पा रहा है. छोटी मछलियों के जाल में फंसने पर उन्हें वापस समुद्र में छोड़ दिया जा रहा है.
मछुआरों का कहना है कि यदि मत्स्य विभाग की ओर से समुद्र में मछलियों के पकड़ने पर 61 दिनों की बजाय करीब 90 दिनों की मनाही की गयी होती, तो संभवत: हिलसा मछलियों के आकार में और वृद्धि हो पाती. जो भी हो जून-जुलाई के महीने में बंगाली खाने की थाली में हिलसा मछलियों के व्यंजन ही प्रमुख बने रहेंगे.
