केंद्रीय संयुक्त सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों का पुरुलिया दौरा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मानसिक रोग अस्पतालों का निरीक्षण
आद्रा : सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मानसिक रोग अस्पताल (पागलखाना) के दौरे पर आये केंद्र एवं राज्य के अधिकारियों ने जंजीरों से बंधा एक रोगी की अनदेखी की. गुरुवार को पुरुलिया मानसिक आरोग्य निकेतन के इस घटना की सभी ने निंदा की है.
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गयी कि देश के अधिकांश मानसिक अस्पतालों का बुरा हाल है. कोर्ट ने कमेटी गठित कर इन अस्पतालों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा था.
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव डी पांडे तथा राज्य के अधिकारी विश्वरंजन सतपती, वरिष्ठ अधिकारी एवं मानवाधिकार कमेटी के सदस्यों ने पुरुलिया मानसिक आरोग्य निकेतन का दौरा किया. बांकुड़ा रानीबांध थाने के निवासी भरत महतो अपने पुत्र रवि महतो (28) को लेकर पुरुलिया आरोग्य अस्पताल पहुंचे. जंजीरों में बंधा था तथा एक कपड़ा पहने हुये था. वह अस्पताल में बैठा हुआ था. अधिकारियों की टीम ने कई बार उसे देखा लेकिन उसे गंभीरता से नहीं लिया. डी पांडे ने कहा कि उनकी नजर में रवि नहीं आया था.
इसके बाद उन्होंने अस्पताल के चिकित्सकों से इसकी जानकारी ली तथा जंजीर खोल कर इलाज करने का निर्देश दिया. उन्होंने अस्पताल के आधुनिकीकरण के लिये रिपोर्ट सौंपने का आश्वासन दिया. अस्पताल परिसर में ही रवि की जंजीर काटकर उसे अस्पताल में दाखिल किया गया.
श्री महतो ने कहा कि रवि बचपन से ही मानसिक तौर पर बिमार है और वह हमेशा गांव वालों एवं घरवालों को मारता रहता है. इस कारण उसे जंजीर पहनाकर रखते थे. राज्य के साथ रांची अस्पताल में भी रवि का इलाज हुआ पर वह ठीक नहीं हुआ. इससे पहले भी उसे पुरुलिया लाया गया था पर उसका दाखिला नहीं हुआ.
