कोवे स्टील से एमओयू शीघ्र

विजन 2025 के तहत विभिन्न प्लांटों में सेल निवेश करेगा डेढ़ लाख करोड़ आसनसोल : स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के अध्यक्ष सीएस वर्मा ने कहा कि दुर्गापुर में एलॉय स्टील प्लांट (एएसपी) व जापानी इस्पात कंपनी कोवे स्टील के ज्वायंट वेंचर के लिए नये सिरे से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया जायेगा. एक विशेष […]

विजन 2025 के तहत विभिन्न प्लांटों में सेल निवेश करेगा डेढ़ लाख करोड़
आसनसोल : स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के अध्यक्ष सीएस वर्मा ने कहा कि दुर्गापुर में एलॉय स्टील प्लांट (एएसपी) व जापानी इस्पात कंपनी कोवे स्टील के ज्वायंट वेंचर के लिए नये सिरे से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया जायेगा.
एक विशेष भेंट में उन्होंने कहा कि सेल कीमौजूदा वार्षिक उत्पादन क्षमता 24 मिलियन टन को बढ़ा कर 50 मिलियन टन तक ले जाने के लिए कंपनी ने विजन 2025 निर्धारित किया है तथा इसके लिए आनेवाले समय में डेढ़ लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा.
श्री वर्मा ने कहा कि जापानी कंपनी कोवे स्टील के साथ वर्ष 2012 में सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया था. इसके तहत एलॉय स्टील प्लांट परिसर में 1500 करोड़ रुपये की लागत से आयरन ओर नगेट्स प्लांट की स्थापना संयुक्त उपक्रम (ज्वायंट वेंचर) के रूप में की जानी थी. इसके लिए आवश्यक जमीन, आयरन ओर, इंजीनियरिंग सेवा से संबंधित सभी सुविधाएं एएसपी को देनी थी. कोवे स्टील के स्तर से सिर्फ तकनीक उपलब्ध कराया जाना था. इस संयुक्त उपक्रम से विशेष किस्म के इस्पात का निर्माण किया जाना था.
इसका उपयोग विमान बनाने सहित विशेष कार्यो में किया जाना था. लेकिन तकनीकी कारणों से यह मामला लंबित हो गया था. उन्होंने कहा कि यह बाधा दूर हो गयी है तथा शीघ्र ही कोबे स्टील के साथ नये सिरे से एमओयू पर हस्ताक्षर किया जायेगा. इसके लिए कोबे स्टील अत्याधुनिक तकनीक उपलब्ध करायेगी.
जानकार सूत्रों के बताया कि कोवे स्टील ने जो तकनीक देने का वादा किया था, वह काफी आधुनिक है तथा ‘आइटीएमकेथ्री’ के नाम से जाना जाता है. इस तकनीक पर पूरे विश्व में सिर्फ एक कारखाना ही स्थापित है. मिनेसोटा (जापान) में स्थित इस कारखाने में इस तकनीक का उपयोग हो रहा है.
लेकिन वहां भी यह पूरी तरह से ट्रायल में सफल नहीं हो पाया था. वहां उत्पादन क्षमता का मात्र 75 फीसदी ही उत्पादन हो रहा था. जापानी कंपनी का तर्क था कि जब तक यह तकनीक पूरी तरह से सफल नहीं हो जाती, इस पर केंद्रित होकर कोई प्लांट नहीं लगाया जा सकता. लेकिन इस तकनीक को संशोधित कर इसे अत्याधुनिक कर लिया गया है तथा यह ट्रायल में पूरी तरह से सफल रहा है. इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसमें डंप आयरन ओर फाइन के उपयोग की प्रक्रिया शामिल है.
पर्यावरण के लिए यह बड़ी उपलब्धि है. इस तकनीक में ऊर्जा स्त्रोत के प्राथमिक रूप में कोयले के उपयोग को खारिज कर दिया गया है. इससे प्रदूषण काफी नियंत्रित रहता है तथा ग्रीन फील्ड रहता है. हाल के दिनों में यह तकनीक पूरी तरह से सफल मानी जा रही है.
सेल चेयरमैन श्री वर्मा ने कहा कि नये सिरे से एमओयू होने के बाद डीपीआर का निर्माण किया जायेगा तथा इसके बाद इस प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इस प्रस्ताव को सरकारी मंजूरी मिल चुकी है तथा औपचारिकताओं के पूरा होते ही यह हकीकत में बदल जायेगा.
यह इस तकनीक पर आधारित विश्व का दूसरा प्लांट होगा तथा इसके उत्पादों की मांग पूरे विश्व में होगी. उन्होंने कहा कि विजन 2025 के तहत सेल ने अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़ा कर 50 मिलियन टन करने के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनायी है. इस समय वार्षिक उत्पादन क्षमता 24 मिलियन टन है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इस्को स्टील प्लांट के आधुनिक व विस्तारित प्लांट का लोकार्पण किया. इसके बाद आइएसपी की क्रूड स्टील उत्पादन की वार्षिक क्षमता बढ़ कर 2.5 मिलियन टन हो गयी है. लेकिन वर्ष 2025 तक इस क्षमता को बढ़ा कर 5.6 मिलियन टन तक ले जाया जायेगा. उन्होंने कहा कि इस प्लांट के आधुनिकीकरण के बाद सेल के विजन 2025 दस्तावेज में दुर्गापुर स्टील प्लांट (डीएसपी) के आधुनिकीकरण की योजना है.
डीएसपी की हॉट मेटल उत्पादन ककी वार्षिक क्षमता इस समय 2.2 मिलियन टन है. आधुनिकीकरण के बाद इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़ कर नौ मिलियन टन हो जायेगी. इन दोनों प्लांटों के आधुनिकीकरण में 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा.
उन्होंने कहा कि यदि इसके साथ ही एएसपी व कोवे स्टील के ज्वायंट वेंचर के दो हजार करोड़ के निवेश को जोड़ दिया जाये तो पश्चिम बंगाल में आनेवाले समय में निवेश की राशि 42 हजार करोड़ हो जायेगी.

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