पानागढ़ : वीरभूम जिले के बोलपुर शांतिनिकेतन के पौष मेले में हस्तकला व कुटीर उद्योग पर मेले के तीसरे दिन मंदी की मार साफ तौर पर देखी गयी. आज तीसरे दिन मौसम की मार के कारण मेले में पर्यटकों की भीड़ सुबह से कम रही. व्यवसायियों का कहना है कि इस बार मेले में कुटीर उद्योग से जुड़े हस्तकला के सामानों की बिक्री काफी कम हुई है. व्यवसायी हरे कृष्ण माझी का कहना है कि इस बार मेले में हस्तकला के सामानों को लेकर पहुंचे हुए थे. लेकिन बाजार काफी मंदा नजर आ रहा है.
पौष मेला : मंदी की मार झेल रहा कुटीर उद्योग
पानागढ़ : वीरभूम जिले के बोलपुर शांतिनिकेतन के पौष मेले में हस्तकला व कुटीर उद्योग पर मेले के तीसरे दिन मंदी की मार साफ तौर पर देखी गयी. आज तीसरे दिन मौसम की मार के कारण मेले में पर्यटकों की भीड़ सुबह से कम रही. व्यवसायियों का कहना है कि इस बार मेले में कुटीर […]

मधुबनी कलाकृति को बेचने आई गायत्री देवी का कहना है कि इस बार पौष मेले में बाजार काफी ढीला रहा. खरीदारों की कमी साफ तौर पर देखी गई. मालूम पड़ता है कि स्टॉल का खर्चा भी पूरी तरह से नहीं उठ पाएगा. आज पौष मेले में तीसरे दिन मेले का मिजाज बिगाड़ दिया है. सुबह से ही बादल घिरे हुए हैं.कोहरा छाया रहा.
हल्की बारिश भी हुई. जिले के झारखंड सीमावर्ती से आए कुटीर उद्योग से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि वे लोग मूल रूप से तीर धनुष तथा बांस के फूलदानी बनाने का काम करते हैं. लेकिन इस वर्ष पौष मेले में बाजार काफी मंदा है. मेला पहुंचे पर्यटक गोविंद कुमार का कहना है कि इस प्राचीन मेले में आने के बाद काफी उत्साह आनंद का माहौल रहता है.
प्रत्येक वर्ष पौष मेले में वे पहुंचते हैं. इस वर्ष मेले में प्रशासन की ओर से व्यवस्था कड़ी की गई है. बावजूद कुटीर व हस्तकला सामानों के दाम काफी बढ़े हुए हैं. बताया जाता है कि पौष मेले में मूल रूप से पर्यटक कुटीर उद्योग व हस्तकला से जुड़े सामानों की खरीदारी करने के लिए पहुंचते हैं .
लेकिन इस वर्ष पौष मेले में कुटीर उद्योग तथा हस्तकला के सामानों की भरमार होने के बावजूद पर्यटक का कहना है कि सामानों के बढ़े दामों के कारण ही खरीदारी कम हुई है. वे लोग मेला का लुत्फ उठाकर चले गए. पौष मेला व्यवसायी संगठन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह का कहना है कि इस बार मेले में कुटीर तथा हस्तकला उद्योग व्यवसाय काफी मंदा रहा है.