शौचालय की सफाई नहीं होने से हालत नारकीय

महिलाओं के लिए समस्या बढ़ी, कूड़ेदान न होने से खुले स्थानों पर गंदगी का अंबार. पार्षद का दावा सिरे से खारिज किया लोगों ने. आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 27 अंतर्गत द्वारका डंगाल कोड़ापाड़ा इलाके में लोग सरकारी सफाई व्यवस्था से भारी नाराज हैं. इलाके में सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की […]

महिलाओं के लिए समस्या बढ़ी, कूड़ेदान न होने से खुले स्थानों पर गंदगी का अंबार.

पार्षद का दावा सिरे से खारिज किया लोगों ने.
आसनसोल : नगर निगम के वार्ड संख्या 27 अंतर्गत द्वारका डंगाल कोड़ापाड़ा इलाके में लोग सरकारी सफाई व्यवस्था से भारी नाराज हैं. इलाके में सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है. सामूहिक शौचालय की हालत इतनी खराब है कि यहां जाने पर ही लोग बीमार हो जाएंगे. महिलाओं के लिए समस्या चरम पर है.
कूड़ेदान न होने से गंदगी चारों ओर फैली रहती है. नाली का पानी सड़कों पर बहता है. बरसात के दिनों में इलाके की हालत भयावह हो जाती है. ग्यारह हजार की आवादी वाले इस वार्ड में 16 सफाई कर्मी हैं. पार्षद का दावा है कि वार्ड के सभी इलाकों में नियमित सफाई की जाती है. जबकि उनके दावा जमीनी हकीकत से काफी दूर है.
आंखों देखी
वार्ड संख्या 27 अंतर्गत द्वारका डंगाल कोड़ापाड़ा इलाके में नियमित रूप से सफाई नहीं होने से इलाके में गंदगी भरा पड़ा है. कूड़ादान न होने से लोग घरों का कूड़ा बाहर कहीं भी खुले में ही फेंकने को विवश हैं. सफाई कर्मी द्वारा सफाई नहीं किये जानेसे लोग मजबूरी में खुद सफाई करते हैं. फॉगिंग मशीन का उपयोग नहीं किये जाने से मच्छरजनित रोगों का खतरा हमेशा बना है.
स्थानीय लोगों का बयान
छोटू ओरांग ने कहा कि इलाके में महीने में एक से दो बार ही सफाई कर्मी आते हैं. इलाके की सफाई ठिक से नहीं करते है. कीटनाशक का स्प्रे, ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव और फॉगिंग मशीन का उपयोग नहीं किया जाता है.
उत्तम ओरांव ने कहा कि सफाइ कर्मी आते भी हैं तो ठिक से सफाई नहीं करते हैं. जल्दबाजी और मनमर्जी ढंग से सफाई करते हैं. दूसरे इलाके में भी सफाई करनी है कह कर तुरंत चले जाते हैं. इलाके में कूड़ेदान की मांग की गयी थी. परंतु अब तक नहीं बनाया गया.
गौरी ओरांव ने कहा कि नाली की व्यवस्था नहीं होने से लोग गंदे माहौल में रहने को विवश हैं. घरों से निकलने वाले गंदे पानी को मुख्य नाली से मिलाने के लिए नाली निर्माण की मांग की गयी थी. पार्षद ने आश्वासन भी दिया था. परंतु नालियों का निर्माण नहीं किया गया. मुख्य नाली की भी नियमित रूप से सफाई नहीं होने से पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है.
मंगला देवी ने कहा कि घरों में शौचालय नहीं होने से लोग सामुदायिक शौचालय का उपयोग करते हैं. शौचालय की सफाई नहीं होने से लोग उसका उपयोग करने से कतराते हैं और खुले में शौच के लिए जाते हैं. सफाई कर्मियों पर शौचालय की सफाई नहीं करने का आरोप लगाया.
शिबरती ओरांव ने कहा कि कूड़ेदान नहीं होने से लोग घरों का कचड़ा जहां तहां फेंकने को विवश हैं.
नियमित रूप से सफाई कर्मी के नहीं आने से कचड़ा इलाके में बिखरा पड़ा रहता है. उन्होंने पार्षद द्वारा इलाके में सफाई की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. सफाई कर्मियों से कीटनाशकों का छिड़काव करने को कहने पर कहते हैं कि यह उनके इलाके के लिए नहीं है.
सावित्री ओरांव ने कहा कि वार्ड में कभी कभार ही कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है. नालियों की सफाई नहीं होने से रात के समय मच्छरों की भरमार रहती है. जिससे मच्छरजनित रोगों का खतरा बना रहता है. पार्षद इलाके में कभी कभार ही आते हैं. सफाई कार्यों का जायजा नहीं लेते हैं.
क्या कहते हैं पार्षद दीपक साव
वार्ड संख्या 27 के पार्षद दीपक कुमार साव ने कहा कि उनके वार्ड के प्रत्येक हिस्से में नियमित रूप से सफाई की जाती है. 11 हजार की आबादी वाले वार्ड में कुल 16 सफाई कर्मी हैं. जो नियमित हर इलाके की सफाई करते हैं. कीटनाशक और ब्लीचिंग पावडर का छिड़काव तथा फॉगिंग मशीन का उपयोग किया जाता है. जरूरत के अनुरूप वार्ड के प्रत्येक इलाके में ब्लिचिंग पावडर छिड़का जाता है. वार्ड की आबादी और बड़े इलाके को देखते हुए सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है.

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