शांतिवन प्रोजेक्ट चार में जमीन म्यूटेशन पर रोक

जमीन लेने वालों ने जिलाशासक से लगायी गुहार पिछले एक साल से जमीन म्यूटेशन के लिए सरकारी कर्यालय का चक्कर लगा रहे थे गाड़ूयी मौजा में बना है शांतिवन प्रोजेक्ट आसनसोल : राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर पुराना टोलप्लाजा के निकट गाड़ूयी मौजा में हनीमेन हाऊसिंग एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड की प्रोजेक्ट शांतिवन चार में स्थित […]

जमीन लेने वालों ने जिलाशासक से लगायी गुहार

पिछले एक साल से जमीन म्यूटेशन के लिए सरकारी कर्यालय का चक्कर लगा रहे थे
गाड़ूयी मौजा में बना है शांतिवन प्रोजेक्ट
आसनसोल : राष्ट्रीय राजमार्ग दो पर पुराना टोलप्लाजा के निकट गाड़ूयी मौजा में हनीमेन हाऊसिंग एंड डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड की प्रोजेक्ट शांतिवन चार में स्थित जमीनों के म्यूटेशन को लेकर जमीन क्रय करनेवालों ने जिलाशासक से गुहार लगाई. यहां की जमीन का म्यूटेशन न होने पर जमीन लेने वाले बुरी तरह फंस गए हैं. पिछले एक वर्ष से लोग जमीन म्यूटेशन को लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं.
जिला प्रशासन ने यहां की जमीन के म्यूटेशन पर रोक लगा दी है. संस्था की जमीन को भेस्ट करने की प्रक्रिया के तहत म्यूटेशन रोक दिया गया है. सोमवार को यहां जमीन लेनेवालों ने अतिरिक्त जिलाशासक (एलआर) खुर्शीद अली कादरी से मुलाकात की. श्री कादरी ने लोगों को कहा कि जमीन से जुड़ी कागजात महकमा शासक को जमा कराए. मानविक आधार पर जो भी सम्भव होगा, करने का प्रयास किया जाएगा.
क्या है मामला
हनीमेन संस्था ने गाड़ूयी मौजा में जमीन अधिग्रहण कर प्लॉटिंग करने का कार्य वर्ष 2006 के आरम्भ किया. यहां जमीन लेने वाले विनय रजक, दीपेन सोम आदि ने बताया कि डेढ़ से तीन कट्ठा करके प्लॉट बनाया गया था. 90 हजार से एक लाख 20 हजार रुपया कट्ठा के हिसाब से यहां जमीन बिकी. कंपनी ने कहा था कि प्रोजेक्ट एरिया के सड़क, पानी, बिजली, चारदीवारी उपलब्ध होगी और जमीन की रजिस्ट्री के बाद सभी के नाम पर म्यूटेशन भी कंपनी ही करवाकर देगी.
जमीन की राशि भुगतान करने के लिए 36 माह की क़िस्त की सुविधा भी दी गयी थी. करीब डेढ़ हजार लोगों ने इस प्रोजेक्ट में जमीन लिया है. कुछ का रजिस्ट्री हुआ है, कुछ का बाकी है. लेकिन जमीन का म्यूटेशन किसी का नहीं हुआ है. प्रोजेक्ट एरिया में सड़क, बिजली, पानी व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी नहीं हुई.
कंपनी का चक्कर लगाने के बाद लोग जब खुद म्यूटेशन के लिए सरकारी कार्यालय में पहुंचे तो जानकरी मिली कि यहां के जमीन का म्यूटेशन नहीं होगा. कारण कोई नहीं बता रहा है. म्यूटेशन का आवेदन भी जमा नहीं लिया जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर दो सितम्बर 2019 को जिलाशासक को ज्ञापन दिया गया. अतिरिक्त जिलाशासक (जनरल) अरिंदम राय के साथ बैठक हुई.
उन्होंने डिप्टी डीएलएंड एलआरओ से इस मुद्दे पर बात की और सभी को अपना कागजात डिप्टी डीएलएंडएलआरओ के पास जमा करने को कहा. कागजात जमा किया गया. लेकिन म्यूटेशन नहीं हो रहा है. इसी मुद्दे पर सोमवार को जिलाशासक से मुलाकात करने का प्रयास किया गया. उन्होंने अतिरिक्त जिअलशासक श्री कादरी के पास भेज दिया. श्री कादरी से भी कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला. उन्होंने महकमा शासक के पास कागजात जमा करने को कहा.
क्यों नहीं हो रहा जमीन का म्यूटेशन
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हनीमेन संस्था की जमीन भेस्ट करने की प्रक्रिया आरम्भ हुई है, जिसके कारण राज्य के किसी भी जिला में संस्था की जमीन का म्यूटेशन नहीं किया जा रहा है. सरकारी नियम के अनुसार एक व्यक्ति अपने नाम पर पूरे राज्य में अधिकतम 17.30 एकड़ जमीन ले सकता है. व्यक्ति का परिवार बड़ा हो तो 24.22 एकड़ जमीन अपने नाम पर रख सकता है. संस्था के लिए भी 24.22 एकड़ जमीन का ही सीलिंग है. उससे अधिक जमीन होने पर सरकार उसे भेस्ट के खाते में डाल देती है.
यदि सीलिंग से अधिक जमीन लेनी हो तो पश्चिम बंगाल एलआर एक्ट 14 वाई में उसे सरकार से अनुमति लेनी होती है. सरकारी अनुमति मिलने के बाद ही वह 24.22 एकड़ से अधिक जमीन ले सकती है. हनीमेन संस्था ने 14 वाई के तहत सरकार से अनुमति नहीं लेकर राज्य के विभिन्न इलाकों में जो जमीन अधिग्रहण किया है वह 24.22 एकड़ से अधिक हो गयी है. जिसके कारण राज्य के हर जिले में संस्था की जमीन का म्यूटेशन के कार्य पर रोक लगा दी गयी है.
हनीमेन की जमीन बांकुड़ा से भेस्ट करने का कार्य आरंभ
सूत्रों के अनुसार, हनीमेन संस्था की जमीन राज्य के विभिन्न जिलों में है. सबसे अधिक जमीन बांकुड़ा जिले में है. नियम के अनुसार जिस जिले में संस्था की जमीन सबसे अधिक होगी. उस जिले से भेस्ट की प्रक्रिया आरम्भ होगी. बांकुड़ा ने संस्था की जमीन भेस्ट करने का कार्य आरंभ किया है. जिसके चलते पूरे राज्य में संस्था की जमीन का म्यूटेशन बंद कर दिया गया है.
हनीमेन का दुर्गापुर स्थित कार्यालय बंद
शांतिवन प्रोजेक्ट चार में हनीमेन संस्था से जमीन लेने वाले दीपेन सोम ने कहा कि संस्था की दुर्गापुर में कार्यालय थी. जिसे बंद कर दिया गया है. ऐसे में यहां जमीन लेने वाले हजारों लोग बर्बादी की कगार पर पहुंच गए है. म्यूटेशन न होने के कारण जमीन पौसेसन मिलने के बावजूद भी निर्माण कार्य सम्भव नहीं हो रहा है. म्यूटेशन के बाद कन्वर्शन होने बाद ही निर्माण कार्य की अनुमति मिलती है. ऐसे में प्रशासन यदि मदद न करे तो लोगों का करोड़ो रुपया डूब जाएगा.

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