कोलकाता : पश्चिम बंगाल में कई ऐसे पिछड़े इलाके हैं, जहां बहुत गरीबी व अशिक्षा है. लड़कियों को नाैकरी के नाम पर, अच्छे कपड़े दिलाने के नाम पर व प्यार के नाम पर बहला-फुसलाकर बाहर ले जाया जाता है व देह व्यापार में धकेल दिया जाता है. इसमें दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व मुर्शिदाबाद के कई ऐसे इलाके हैं, जहां लोग हाशिये पर हैं. वहां न तो शिक्षा है,न ही रोजगार है.
देहव्यापार से बचायी गयी लड़कियों की जिंदगी संवार रहीं जबाला
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में कई ऐसे पिछड़े इलाके हैं, जहां बहुत गरीबी व अशिक्षा है. लड़कियों को नाैकरी के नाम पर, अच्छे कपड़े दिलाने के नाम पर व प्यार के नाम पर बहला-फुसलाकर बाहर ले जाया जाता है व देह व्यापार में धकेल दिया जाता है. इसमें दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व […]

इन इलाकों की लड़कियों को आसानी से टारगेट किया जाता है. बाहरी राज्यों के रेड लाइट एरिया से पुलिस द्वारा उनको रेसक्यू कर होम में भेजा जाता है. हाल ही के आंकड़े बताते हैं कि अब उत्तर बंगाल से चाय बागान की बेरोजगार महिलाएं भी इस पेशे में लायी जा रही हैं.
लड़कियों की तस्करी देश की एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. इसका सबसे दुखद पहलू यह है कि रेसक्यू होने के बाद खुद उनके घरवाले ही उनको रखने से इंकार कर देते हैं. उनका जीवन नर्क बन जाता है. यह जानकारी ‘जबाला एक्शन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन’ की संस्थापक व डायरेक्टर बैताली गांगुली जबाला ने दी. उन्होंने बताया कि कोर्ट से जब लड़कियां यहां भेजी जाती हैं तो उनकी मानसिक स्थिति इतनी खराब होती है कि वे कुछ बोल ही नहीं पाती हैं. वे काफी दहशत व सदमे में होती हैं. उनको समझने में व हीलिंग करने में काफी लंबा समय लग जाता है.
जब वे सामान्य होने लगती हैं, तभी उनकी काउंसेलिंग की जाती है. जब वे खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं, तभी वे कुछ बोल पाती हैं. रेसक्यू होकर ऐसी कई महिलाएं आयी हैं, जो कुपोषण के कारण कई बीमारियों की शिकार हो जाती हैं. यहां आने के बाद उनका एचआइवी टेस्ट व प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाता है. पाैष्टिक भोजन के साथ उनका उपचार भी किया जाता है. श्रीमती गांगुली ने जानकारी दी कि देह व्यापार से बचायी गयी लड़कियों व महिलाओं को सम्मानपूर्वक जीवन देने के लिए ही जबाला संस्था काम कर रही है. सबसे पहले 1992 में बहुबाजार रेड लाइट एरिया में सेक्स वर्कर के बच्चों की शिक्षा व सेफ चाइल्डहुड को लेकर काम किया गया.
संस्था का रजिस्ट्रेशन 1995 में होने के बाद ट्रैफिकिंग व बाल-विवाह को रोकने के लिए संस्था सक्रिय हुई. पिछले 4 सालों में ही लगभग 250 लड़कियों को ट्रेनिंग दी गयी है. इसमें कल्चर थेरेपी, हाऊस कीपिंग, कैटरिंग मैनेजमेंट व मोटर ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाती है. कई लड़कियां अभी अपने स्तर पर कैन्टीन भी चला रही हैं. इसमें 60 लड़कियां अभी अच्छा रोजगार कर रही हैं. यह एक कोशिश है लेकिन देश में देह व्यापार से बचायी गयी लड़कियों का पूरी तरह पुर्नवास तभी हो सकता है, जब उनके प्रति समाज का नजरिया बदलेगा.
समाज व खुद उनका परिवार उनसे इतनी नफरत करता है कि वे जीने की उम्मीद ही छोड़ देती हैं. किसी साजिश में फंसी इन लड़कियों को भी सम्मान से जीने का हक है, इसी लक्ष्य के लिए संस्था काम कर रही है. जबाला जालंगी, हरिहरपाड़ा, बेलडांगा व बारोह, जॉयनगर, काकदीप, मुशिदाबाद में कई जागरुकता कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं. लोगों को संदेश दिया जाता है कि किसी पर भी भरोसा करके लड़की को बाहर न भेजें.
माइग्रेशन तो निरन्तर प्रक्रिया है लेकिन इसमें कहीं भी सिक्युरिटी नहीं है, यही कारण है कि लड़कियां देह व्यापार में धकेल दी जाती हैं. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, वीरभूम, मालदा में ट्रेफिकिंग व बाल विवाह बड़ी समस्याएं हैं. जबाला ऐसी लड़कियों को ट्रेंड कर उनको नये सिरे से जीवन जीने का एक माैका दे रही है.