प्रदूषण बना मानव के अस्तित्व पर संकट

प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधारोपण, जल संरक्षण हैं बेहद जरूरी बारिश के जल संरक्षम के साथ ही प्रदूषण जल का शोधन भी आवश्यक आसनसोल : पर्यावरण जागरूकता के मुद्दे पर राज्य सरकार के जिला पर्यावरण विभाग एवं बीबी कॉलेज ने कॉलेज के विवेकानंद सभागार में एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित की. उद्घाटन प्रिंसिपल डॉ अमिताभ बसु […]

प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधारोपण, जल संरक्षण हैं बेहद जरूरी

बारिश के जल संरक्षम के साथ ही प्रदूषण जल का शोधन भी आवश्यक

आसनसोल : पर्यावरण जागरूकता के मुद्दे पर राज्य सरकार के जिला पर्यावरण विभाग एवं बीबी कॉलेज ने कॉलेज के विवेकानंद सभागार में एकदिवसीय संगोष्ठी आयोजित की. उद्घाटन प्रिंसिपल डॉ अमिताभ बसु एवं बर्दवान यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ अपूर्व रतन घोष ने किया.

पर्यावरणविदों ने वनों की कटाई पर रोकथाम, कारखानों के बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए पौधारोपण और जल संरक्षण पर बल दिया. पेट्रोल, डीजल के स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा एवं ईंधनों के उपयोग को अनिवार्य बताया. वैश्विक तापमात्रा में नियमित बढोत्तरी से ध्रुविय क्षेत्रों में पिगलते ग्लेशियरों एवं हिमखंडों को लेकर चिंता जतायी.

बर्दवान यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विभाग के डॉ घोष ने वर्तमान समय में वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साईड गैस के बढ़ते स्तर पर बेहद गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे मानव के अस्तित्व के लिए घातक बताया. उन्होंने अमेरिका में हुए पर्यावरणविदों एवं पर्यावरण पर कार्य करने वाले संगठनों के संगोष्ठी में नेताओं को वायुमंडल में तेजी से बढ़ते कार्बन डाई ऑक्साईड के स्तर को तुरंत नियंत्रित करने के लिए दी गयी चेतावनी पर कदम उठाने को कहा.

उन्होंने कहा कि लाखों वर्ष पहले वायुमंड��� में कार्बन का स्तर काफी कम था. परंतु में यह घातक स्तर पर पहुंच जाने से जीवों के अस्तित्व को प्रभावित कर रहा है. इसके लिए अंधाधुध वनों एवं जंगलों की लगातार कटाई और उनके स्थान पर पर्याप्त पौधे न लगाने को उन्होंने प्रमुख कारण बताया.

दुर्गापुर गवर्नमेंट कॉलेज के अध्यापक डॉ मैत्री चक्रवर्ती ने मंडराते जल संकट पर ध्यान आकृष्ट करते हुए जल संरक्षण के उपायों को अपनाने पर बल दिया. उन्होंने वर्षा जल के संरक्षण और उपयोग के बाद दूषित जल को साफ कर उसे अन्यान्य रूपों में उपयोग करने की सलाह दी. डॉ परिमल घोष, डॉ चंचल विश्वास आदि उपस्थित थे.

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