हड़ताल तय करेगी सीआइएल का भविष्य

आसनसोल में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सम्मेलन में बना प्रचार कार्यक्रम सभी यूनियनों को इसमें शामिल करने के लिए की जायेगी पहल नेतृत्व से कोयला उद्योग को विदेशी कंपनियों के हाथों बेचने के लिए लिया यह निर्णय आसनसोल : केंद्र सरकार द्वारा कोयला खनन में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के निर्णय को वापस […]

आसनसोल में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सम्मेलन में बना प्रचार कार्यक्रम

सभी यूनियनों को इसमें शामिल करने के लिए की जायेगी पहल नेतृत्व से

कोयला उद्योग को विदेशी कंपनियों के हाथों बेचने के लिए लिया यह निर्णय

आसनसोल : केंद्र सरकार द्वारा कोयला खनन में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के निर्णय को वापस लेने, कोल इंडिया के सभी अनुषांगिक कंपनियों को मिलाकर कोल इंडिया लिमिटेड के गठन करने और कोयला उद्योग में ठेकेदारी, आउटसोर्सिंग, माइनिंग डेवेलपर्स ऑपरेटर (एमडीओ) कोयला उत्खनन, संप्रेषण के कार्य को बंद कर उक्त कार्य में लगे सभी श्रमिकों को कोल इंडिया का मजदूर घोषित करने की तीन सूत्री मांगों के समर्थन में विभिन्न केंद्रीय यूनियनों के फेडरेशनों द्वारा 24 अगस्त को पूरे कोल इंडिया में एक दिन की आम हड़ताल की घोषणा को इसीएल में पूर्ण रूप से सफल बनाने को लेकर गुरुवार को आसनसोल गुजराती भवन में ज्वायंट एक्शन कमेटी (जैक) का सम्मेलन हुआ. जिसमें इस हड़ताल की सफलता की रणनीति तय कर दिशा निर्देश जारी किया गया.

अध्यक्षता एटक के प्रभात राय, एचएमएस के प्रफुल्ल चटर्जी, सीटू के विवेक चौधरी, इंटक के चंडी बनर्जी, यूटीयूसी के माधव बनर्जी, टीयूसीसी के भवानी आचार्या की अध्यक्ष मंडली ने की. पूर्व सांसद सह एटक नेता आरसी सिंह, अखिलेश सिंह, पूर्व विधायक सह सीटू के गौरांग चटर्जी, गिरीश श्रीवास्तव, इंटक के आरपी शर्मा, एचएमएस के एसके पांडे, विशुनदेव नोनिया आदि उपस्थित थे. सभी यूनियन से भारी संख्या में नेता व समर्थक उपस्थित थे.

सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि सोनपुरबाजारी, खोट्टाडीह और झांझरा में सभी यूनियनों के सेंट्रल कमेटी के नेता संयुक्त रूप से सभा करेंगे. इसके अलावा हर कोलियरी तथा एरिया में जैक के बैनर तले नियमित सभा होगी. सभा के जरिये लोगों को हड़ताल का औचित्य बताया जायेगा. 24 सितंबर को इसीएल में कोयला का उत्पादन और सम्प्रेषण का कार्य पूर्ण रूप से बंद कर इस हड़ताल को सफल करना होगा. अन्य यूनियनें जो इस हड़ताल में शामिल नहीं हुई है मंच से उन्हें इस हड़ताल में शामिल होने की अपील की गई.

वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2014 में भाजपा की सरकार आते ही कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2015 को पारित कर न सिर्फ कोयला उद्योगों निजीकरण को लागू किया, बल्कि व्यवसायिक माइनिंग के नाम पर कोयला बेचने की छूट दे दी. कोल इंडिया के 63 हजार करोड़ रुपया से ज्यादा का आरक्षित फंड हड़प लिया.

आनुषांगिक कम्पनियों के कोष को भी शेयरों के बाई बैक करवाकर हड़प लिया. कम्पनी के खुद के फंड से ही कोल इंडिया को खदानों को विकसित कर देश की ऊर्जा में अपना सर्वोपरि योगदान दे सकती है. देश के विकास में तीन प्रतिशत की भागीदार अकेले कोल इंडिया निभाती है. ऐसे में इस संस्था के विकास के बजाय इसमें सौ फीसदी एफडीआई लागू कर देश के विकास को बाधित करने का निर्णय केंद्र सरकार ने लिया है.

विदेशी कंपनियां यहां सिर्फ मुनाफा कमाने आएंगी. रोजगार सृजन और देश के विकास से उसका कोई लेना देना नहीं होगा. मोदी सरकार देश के हित के बजाय कुछ पूंजीपतियों के स्वार्थ में यह निर्णय लिया है. सरकार यदि अपने इस निर्णय को लागू करने में सफल हो गयी तो कोयला उद्योग पर घोर संकट आ जायेगी. श्रमिक, कर्मचारी, अधिकारी, ठेका श्रमिक किसी की भी रोजगार की कोई गारंटी नहीं होगी. इसके विरोध में रांची में पांच सितंबर को सभी फेडरेशनों की बैठक में 24 सितंबर को एक दिन का हड़ताल का निर्णय लिया गया है. यह हड़ताल ही देश और श्रमिकों का भविष्य तय करेगी.

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