नया कोल माइंस रेगुलेशन एक्ट अगले माह

कांट्रेक्टर एवं सप्लायर को भी किया गया है अलग से परिभाषित खदान ऑपरेटरों को अपने स्तर से सुरक्षा प्लान बनाने की मंजूरी सांकतोड़िया : ईसीएल सहित कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में लागू छह दशक पुराने कोल माइंस रेगुलेशन एक्ट 1957 में बदलाव की तैयारी है. जानकार सूत्रों के अनुसार अगस्त के अंत तक इस […]

कांट्रेक्टर एवं सप्लायर को भी किया गया है अलग से परिभाषित

खदान ऑपरेटरों को अपने स्तर से सुरक्षा प्लान बनाने की मंजूरी
सांकतोड़िया : ईसीएल सहित कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में लागू छह दशक पुराने कोल माइंस रेगुलेशन एक्ट 1957 में बदलाव की तैयारी है.
जानकार सूत्रों के अनुसार अगस्त के अंत तक इस संबंध में श्रम मंत्रालय नोटिफिकेशन जारी करेगा. उसके बाद सभी कोयला खदानों में नया माइंस रेगुलेशन एक्ट लागू हो जायेगा. इसकी फाइल खान सुरक्षा महानिदेशालय ने पहले ही श्रम मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेज दी थी. कैबिनेट ने उस पर सहमति जताते हुए अपनी मुहर भी लगा दी है. खान सुरक्षा महानिदेशालय के महानिदेशक उत्पल साहा ने कहा की प्रस्ताव की कानूनी जांच के उपरांत गजट नोटिफिकेशन जारी कर दी जायेगी.
नये कोल माइंस रेगुलेशन एक्ट में कांट्रेक्टर एवं सप्लायर को भी परिभाषित किया गया है. सभी की जिम्मेदारी भी तय की गई है. नए एक्ट में माइंस ऑपरेटर सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान खुद तय कर पायेंगे. पहले माइंस ऑपरेटर खुद से कोई निर्णय नहीं ले पाते थे. ओपनकास्ट खदानों में कार्य करने के लिए कर्मचारियों को रिस्ट्रिक्टेड प्रमाण पत्र दिया जायेगा. वे बिना प्रमाण पत्र के कार्य नहीं कर पायेंगे. फर्स्ट व सेकंड क्लास मैनेजर, ओवरमैन, सर्वेयर, फोरमैन एवं माइनिंग सरदार आदि के लिए प्रमाण पत्र आवश्यक होगा.
नये रेगुलेशन से कोल ऑपरेटर को सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि नया रेगुलेशन गोल सेटिंग होगा, जिसमें सुरक्षा नियमों को पूरा करने की जवाबदेही बढ़ जायेगी. उन्होंने कहा कि माइंस एक्ट में बदलाव के लिए नौ सदस्यीय कमेटी का गठन वर्ष 2007 में किया गया था. नया माइंस रेगुलेशन का खाका तैयार करने में कमेटी को आठ वर्ष से अधिक का समय लगा. जिसके पश्चात 358 पेज का प्रस्ताव तैयार हो सका. लीगल सेल में प्रस्ताव की जांच के उपरांत मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया जायेगा.

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