•सर्च अभियान ठंडा पड़ने से लोग कर रहे हैं मनमानी
•नालियां हो रहीं अवरुद्ध, पर्यावरणीय समस्याएं हो रही उत्पन्न
दुर्गापुर : प्रशासन के पॉलिथीन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी शिल्पांचल में खुले आम इसका उपयोग किया जा रहा है. कार्रवाई नहीं होने से इसका धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है. पॉलीथीन नालियों को जाम भी कर रहे हैं, वहीं पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है. महज कुछ माह के अंतराल के बाद से ही शिल्पांचल के बाजार में प्लास्टिक बैग का सर्च अभियान ठंडा पड़ गया. खुदरा सामान बेचने वाले दुकानदारों और सड़क किनारे फुटकर व ठेले वालों के पास प्लास्टिक के कैरी बैग आसानी से देखे जा सकते हैं. कई दुकानदारों ने पूछने पर बताया कि अब प्लास्टिक बैग फिर से बाजार में आ चुका है.
हर जगह दिखने लगा है प्लास्टिक का बैग
शिल्पांचल के बेनाचिती सहित अन्य बाजार की मांस-मछली मंडी, सब्जी मंडी, फल मंडी या फिर सड़क किनारे फुटकर दुकानदारों की बात हो, अधिकांश प्लास्टिक के कैरी बैग का उपयोग कर रहे हैं. बीते वर्ष अप्रैल में महकमा प्रशासन ने दुर्गापुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से इलाके में पॉलीथीन के उपयोग पर बैन लगाया था. दुकानों में इसका उपयोग करने पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. इस आदेश के बाद कुछ दिनों तक तो इस पर अमल हुआ. तत्कालीन महकमा शासक शंख सांतरा की ओर से प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग करने पर कार्रवाई करते हुए जब्ती की कार्रवाई की गई. समय के साथ कार्रवाई थम गई है और फिर से प्रतिबंधित पॉलिथीन का उपयोग बढ़ने लगा है. शहर में सभी दुकानदारों द्वारा पॉलिथीन का प्रयोग किया जा रहा है और प्रशासन आंखें बंद कर तमाशा देख रही है. बताया जाता है की प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग गंभीर रूप से हानिकारक है, गटर नालियों को भी ये अवरूद्ध करते हैं. इसके फलस्वरूप गंभीर पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न होती है. इस बाबत दुर्गापुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के सचिव भोला भगत का कहना है की प्लास्टिक के बैग को लेकर चेम्बर की ओर से लोगों को जागरूक किया जा रहा है लेकिन प्रशासन द्वारा पूरा सहयोग नही मिल पाने के कारण लोग मनमाने तरीके से प्लास्टिक बैग का उपयोग कर रहे है.
पशुओं के लिए नुकसानदायक
प्लास्टिक थैली का उपयोग करने के बाद रद्दी थैली को कचरे में डाल दिया जाता है. इसे जानवर खाते हैं तो कोई प्लास्टिक थैली को जलाता है. इसके धूएं से भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. इससे बचने के लिए कागज एवं कपड़े के थैले तथा जूट से बना हुआ बैग आदि का उपयोग करना चाहिए जिससे पर्यावरण में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके.
