आसनसोल : रेल इंजीनियरों ने निकाला जुलूस, धरना, डीआरएम कार्यालय पर काला बैज लगा कर किया प्रतिवाद

आसनसोल : रेल में कार्यरत इंजीनियरों के वेतन में वृद्धि, उन्हें ग्रुप बी का दर्जा देने और दुर्घटनाओं के बाद गठित सेफ्टी कमिटियों की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय रेलवे अभियंता संघ आसनसोल मंडल के बैनर तले जूनियर इंजिनियर और सीनियर सेक्शन इंजिनियरों ने गुरुवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय […]

आसनसोल : रेल में कार्यरत इंजीनियरों के वेतन में वृद्धि, उन्हें ग्रुप बी का दर्जा देने और दुर्घटनाओं के बाद गठित सेफ्टी कमिटियों की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय रेलवे अभियंता संघ आसनसोल मंडल के बैनर तले जूनियर इंजिनियर और सीनियर सेक्शन इंजिनियरों ने गुरुवार को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय पर धरना दिया. उन्होंने काला बैज लगा कर आसनसोल स्टेशन परिसर से रैली निकाली और 13 नंबर मोड़ होते हुए डीआरएम कार्यालय तक पहुंचे.
प्रदर्शनकारी इंजिनीयरों ने डीआरएम पीके मिश्रा को ज्ञापन सौंपा. श्री मिश्रा ने रेल मंत्री पियूष गोयल को भेजने का आश्वासन दिया. रेलवे बोर्ड की हठ धर्मिता के प्रतिवाद में रेल इंजीनियरों ने गुरूवार को काला दिवस मनाया.
आसनसोल मंडल अध्यक्ष यूएस दास, सचिव एचपी गोस्वामी, वित्त सचिव अशोक कुमार ने कहा कि दुर्घटना होने पर रेल अधिकारी कमेटी का गठन करते हैं. जांच के बाद कमेटी रिपोर्ट भी जमा कर देती है. परंतु रेल बोर्ड कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं करता है.
उन्होंने कहा कि सेफ्टी टास्क फोर्स कमेटी, वाँग चू कमेटी, सीकरी कमीशन ने दुर्घटनाओं की जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी थी. परंतु उनकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया. उन्होंने इंजीनियरों के हीत में सुरक्षा कमेटियों की सिफारिशों को लागू करने की मांग की. इंजीनियरों को राजपत्रित ग्रुप बी का दर्जा देने और समयबद्ध प्रमोशन देने की भी मांग की गयी.
अध्यक्ष श्री दास ने कहा कि 13 दिसंबर को देश भर के इंजीनियरों ने नई दिल्ली के जंतर मंतर में अधिकार रैली निकाल कर और धरना देकर रेल मंत्री व रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को ज्ञापन सौंपा था. बावजूद इसके अब तक मांगों पर विचार नहीं किया गया. ट्रेड यूनियनों से इंजीनियर को बाहर रखने का निर्णय हुआ था.
इसे लागू करने की तिथि 30 जनवरी थी. इसे बढ़ाकर 31 मार्च और फिर 30 जून एवं पुनः इसे बढाकर 31 दिसंबर कर दिया गया. संसद के प्रश्न काल में अबतक 10 सांसद इन मुद्दों को उठा चुके है. 100 सांसद रेलवे बोर्ड और रेल मंत्री को पत्राचार कर चुके है. इसके बावजूद आज तक इंजीनियरों को तकनीकी क्षमता के अनुरूप सम्मान , सामाजिक स्तर एवं सही वेतनमान प्राप्त नहीं हुआ.

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