पुष्पिता राय डाकुआ की जगह उमाकांत बर्मन सभाधिपति

कूचबिहार : कूचबिहार जिला परिषद के नये सभाधिपति और उपसभापति चुन लिये गये हैं. शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा घेरे में सभाधिपति चुने गये माथाभांगा दो नंबर पंचायत समिति के पूर्व सभापति तथा वरिष्ठ तृणमूल नेता उमाकांत बर्मन, जबकि उपसभाधिपति चुनी गयीं जिला परिषद की पूर्व सभाधिपति पुष्पिता राय डाकुआ. उल्लेखनीय है कि इस बोर्ड गठन […]

कूचबिहार : कूचबिहार जिला परिषद के नये सभाधिपति और उपसभापति चुन लिये गये हैं. शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा घेरे में सभाधिपति चुने गये माथाभांगा दो नंबर पंचायत समिति के पूर्व सभापति तथा वरिष्ठ तृणमूल नेता उमाकांत बर्मन, जबकि उपसभाधिपति चुनी गयीं जिला परिषद की पूर्व सभाधिपति पुष्पिता राय डाकुआ.
उल्लेखनीय है कि इस बोर्ड गठन को लेकर शुक्रवार को जिला परिषद भवन के सामने तनाव रहा. कई तृणमूल समर्थक नये बोर्ड के खिलाफ नारे लगा रहे थे. जिले के वरिष्ठ तृणमूल नेताओं रवींद्रनाथ घोष, विनय कृष्ण बर्मन, उदयन गुहा के खिलाफ भी नारे लगाये गये. सभाधिपति पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे वरिष्ठ नेता अब्दुल जलील अहमद का कहना है कि उन्हें यह समझ में नहीं आ रह है कि उन्हें इस पद के लिये योग्य क्यों नहीं समझा गया.
अपना सभाधिपति पद छिनने से पुष्पिता राय डाकुआ नाराज नजर आयीं. वह बोर्ड गठन प्रक्रिया खत्म होते ही कार्यालय छोड़कर निकल गयीं. पत्रकारों से उन्होंने शिकायत के लहजे में कहा कि उन्होंने कूचबिहार जिला परिषद के लिए काफी मेहनत की है. 100 दिन के काम में कूचबिहार जिले को देश की पहली पंक्ति में खड़ा किया है. उन्होंने इसके लिए कई पुरस्कार भी लाये हैं. उन्होंने कहा कि इसके बदले आज पार्टी उनका तिरस्कार कर रही है.
एक सवाल पर उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में वह पार्टी में रहेंगी या नहीं, इस पर विचार करेंगी. इस पर कूचबिहार जिला अध्यक्ष रवींद्रनाथ घोष ने बताया कि यह पद किसी एक को ही दिया जा सकता है. सभी को खुश करना मुश्किल है. राज्य कमेटी के निर्देश पर ही सभाधिपति और उपसभापति के लिये नाम की घोषणा की गयी.
कुछ लोग किसी के इशारे पर नारेबाजी कर रहे थे. लेकिन इनका तृणमूल से कोई लेना-देना नहीं है. वहीं, नवनिर्वाचित सभाधिपति उमाकांत बर्मन ने कहा कि उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में विकास योजनाओं को जिले में लागू करना है.
गौरतलब है कि पंचायत चुनाव के बाद से ही अब्दुल जलील अहमद का नाम सभाधिपति की दौड़ में शामिल था. लेकिन ऐनवक्त पर पासा पलट गया. जिला परिषद सभाधिपति उमाकांत बर्मन का नाम घोषित होने के साथ ही रासमेला परिसर में तनाव छाने लगा. तनातनी की स्थिति में तृणमूल कार्यकर्ताओं ने वनमंत्री विनय कृष्ण बर्मन व दिनहाटा के विधायक उदयन गुहा के पोस्टर पर जूते का माला पहनाकर रैली निकाली.
दोनों के खिलाफ कार्यकर्ताओं ने नारे भी दिये. आरोप है कि ये तृणमूल कार्यकर्ता अब्दुल जलील अहमद के समर्थक थे. लम्बे समय से राजनीति में रहे अब्दुल जलील को सभाधिपति नहीं बनाये जाने को लेकर उनमें नाराजगी है. सभाधिपति बने उमाकांत बर्मन को विनय कृष्ण बर्मन का करीबी माना जाता है. इसिलए विनय कृष्ण बर्मन पर गुस्सा फूटा.

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