बदहाली के लिए कर्मी व अधिकारी दोषी

चिनाकुड़ी : चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी परिसर में स्थित खान श्रमिक कॉंग्रेस (बीएमएस) कार्यालय एवं बैजडीह कोलियरी में बीएमएस का 63 वां स्थापना दिवस धूमधाम से सोमवार को मनाया गया. झंडात्तोलन संघ के कोल एवं नन कोल प्रभारी तथा जेबीसीसीआइ सदस्य डॉ वसंत कुमार राय ने किया. बीएमएस के प्रदेश महामंत्री उज्जवल मुखर्जी, उपाध्यक्ष शंकर […]

चिनाकुड़ी : चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी परिसर में स्थित खान श्रमिक कॉंग्रेस (बीएमएस) कार्यालय एवं बैजडीह कोलियरी में बीएमएस का 63 वां स्थापना दिवस धूमधाम से सोमवार को मनाया गया. झंडात्तोलन संघ के कोल एवं नन कोल प्रभारी तथा जेबीसीसीआइ सदस्य डॉ वसंत कुमार राय ने किया. बीएमएस के प्रदेश महामंत्री उज्जवल मुखर्जी, उपाध्यक्ष शंकर दास , एबीकेएमएस के उपाध्यक्ष तापस घोष, खान श्रमिक कॉंग्रेस के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह, महामंत्री धनंजय पांडेय, उप महामंत्री त्रिलोकी सिंह, सचिव दशरथ महतो, क्षेत्रीय अध्यक्ष रामाशंकर राम, सोदपुर क्षेत्र के सचिव विक्रम गौड़, अशोक कुमार, धीरज गिरि, गोविंद माजी, हरेंद्र प्रसाद आदि मौजूद थे.
डॉ राय ने कहा कि संघ की स्थापना 23 जुलाई,. 1955 को भोपाल में महान विचारक दतोपंत ठेंगड़ी ने स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के जन्मदिवस पर की थी. संघ मजदूरों में राष्ट्रभाव के जागरण के लिए कार्य कर रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा संगठन है और मजदूर क्षेत्र का एक मात्र संगठन है जो अविभाजित रह कर 63वां स्थापना दिवस मना रहा है तथा गैर राजनीतिक श्रमिक संगठन के रूप में मजदूरों की सेवा कर रहा है.
उन्होंने कहा कि कोल इंडिया की दुर्गति के लिए 2 .80 लाख मजदूर और 40 हजार अधिकारी संयुक्त रूप से जिम्मेवार है. किसी एक को दोषारोपित नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कोल इंडिया के 2 .80 लाख मजदूर वादा करे तो आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा को पांच दिन में पूरी तरह बंद करा देंगे. केंद्र सरकार भी इस व्यवस्था के खिलाफ है. उत्पादन लक्ष्य को पूरा नहीं किए जाने से विदेशों से कोयला मंगाना पड़ रहा है. देश का पैसा विदेश जा रहा है. उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों को जितने कोयले का जरूरत है
कोल इंडिया उसे पूरा नहीं कर पा रहा है. जिसके कारण विदेशों से कोयला मंगाया जा रहा है अगर कोयला उत्पादन चार दिन ठप पड़ जाए तो पूरे देश में अंधेरा छा जायेगा.उन्होंने कहा कि दसवें राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता में जितनी सुविधाएं तथा वृद्धि की गई है वह मौजूदा समय में काफी है. कई अन्य कंपनीयों में तो वेतन समझौता ही नहीं हो पा रहा है. देश की औधोगिक स्थिति को देखते हुए संगठन को और भी मजबूत करने की जरूरत है.

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